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212. स्कॉटलैंड यात्रा-2

लंदन में रहते हुए, आज फिर से जो अनुभव शेयर कर रहा हूँ वे पिछले वर्ष के हैं। उस समय पहली बार लंदन आया था तो मैं नए अनुभव के साथ-साथ पुराने अनुभव भी लंदन यात्रा के शेयर करता रहूंगा, आज से पिछले वर्ष की स्कॉटलैड यात्रा के अनुभव शेयर करने का दूसरा दिन है-

तीन दिन की स्कॉटलैंड यात्रा में दूसरे दिन के बारे में बात करने से पूर्व यह बता दूं कि यात्रा के दौरान पहली रात हमने ग्लास्गो एयरपोर्ट के पास ही ‘ट्रैवेलॉज’ समूह के होटल में बिताई, जहाँ टूर ऑपरेटर ने हमारे रुकने की व्यवस्था की थी। इस होटल में कांटिनेंटल ब्रेकफास्ट की व्यवस्था थी, जिसमें मुझ जैसे लोगों को बार-बार यह पूछना पड़ता है, ‘ये डिश वेजीटेरिअन है न जी!’

खैर नाश्ता करके हम सुबह 9 बजे भ्रमण के लिए रवाना हुए। चलिए शुरू में संक्षेप में अपने सहयात्रियों के बारे में बता दूं। टूर ऑपरेटर-कम-ड्राइवर महोदय के बारे में तो मैं बता ही चुका हूँ। बस में शुरू की दो पंक्तियों में एक गुजराती परिवार था जिसमें एक पति-पत्नी, उनकी दो बेटियां, जिनमें से एक ‘सी.ए.’ थी जैसा उन्होंने बताया और एक बेटा जो शायद बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा था। उनके बाद दो मद्रासी वृद्धाएं थीं, जो सहेलियां थीं, जिनमें से एक के संबंधी लंदन में रहते हैं। दोनो महिलाएं 70 वर्ष के आसपास उम्र की थीं, एक का बेटा अमरीका में है, जहाँ वह इसके बाद जाने वाली थीं।

वैसे सभी लोग क्योंकि लंदन से इस यात्रा पर रवाना हुए थे, तो जाहिर है कि सभी के संबंधी लंदन में रहते थे और वे वहाँ से ही रवाना हुए थे। हाँ तो बाकी लोग तो रह ही गए, एक परिवार केरल का था, जिसमें युवा माता-पिता और उनकी एक 8-10 साल की बेटी थी। उनके पीछे था कलकत्ता से आया एक परिवार, जो थोड़ा अंग्रेजी संस्कृत्ति से ज्यादा मुतमइन था। मियां-बीबी और छोटा बेटा, जो या तो कभी-कभी बंगला बोलते थे, या ज्यादातर तीनों मिलकर अंग्रेजी में कोई गेम खेलते रहते थे।

अंत में चार लोगों की एक सीट थी, जिस पर हम पति-पत्नी, और हमारे अलावा बंगलौर से आए एक और पति-पत्नी थे, शायद 50 वर्ष के आसपास उम्र के थे।

दूसरे दिन के भ्रमण के बारे में अधिक नहीं बता पाऊंगा, क्योंकि यह शुद्ध प्रकृति की गोद में यात्रा थी, लंबी-चौड़ी सुंदर फैली-पसरी झीलें, बीच-बीच में पहाड़ों घाटियों के बीच सुंदर व्यू-पाइंट, जिसकी खूबसूरती ही उसका वर्णन होती है।

खैर नाम के तौर पर बताऊं तो दूसरे दिन हम इन स्थानों पर गए- लोच-लोमंड जो स्कॉटलैंड की बहुत सुंदर और विशाल झील है, जिसके पास लाल हिरण काफी रहते हैं। यहाँ अत्यंत सुंदर झरना है- ‘फाल ऑफ फलोच, जिसका दृश्य देखते ही बनता है। ब्रिटेन के सबसे ऊंचे पहाडों की छाया में बसे फोर्ट विलियम नगर में गए, वहाँ हमने भोजन किया और उसके बाद आगे ऊंचे पहाडों ‘बेन नेविस’ के बीच रोपवे ट्रॉली ‘गोंडोला’ से ऊपर गए, लेकिन अचानक बरसात आ जाने के कारण हम इसका अधिक आनंद नहीं ले पाए।

लौटते समय हमने फोर्ट विलियम में ही एक दुकान से थ्री डाइमेंशन तस्वीरें लीं जो हमें देखने में बहुत अच्छी लगीं। टूर ऑपरेटर ने बताया था कि यहाँ से सस्ते गिफ्ट आइटम, इधर कहीं नहीं मिलेंगे। कुछ ऐसा ही लगा भी। लौटते समय भी सुंदर पहाड़ और झीलें लुभाते रहे, नाम में क्या रखा है लेकिन कुछ नाम थे- कैलेडोनिअन कैनाल, फोर्ट ऑगस्टस विलेज, लोच (झील) नेस मॉन्स्टर, जिसमें माना जाता है कि दैत्याकार जानवर रहते थे।

हाँ एक फोटो मैं यहाँ लंदन में अपने उस समय के घर से लिया गया डाल रहा हूँ जो बगल में ही थेम्स नदी से होकर गुजरने वाले विशाल शिप का लिया था।

दूसरे दिन की यात्रा का विवरण इतना ही, इसके बाद बात करेंगे तीसरे और अंतिम दिन के बारे में।

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

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2 replies on “212. स्कॉटलैंड यात्रा-2”

The tour is full of Indians. It seems Indians are keeping tourism economy of the UK afloat. The most important point of visiting Europe or US is cleanliness. I am always amazed at the extent streets are cleaned, even trails and lakes appear beautiful free of waste. I wish we could do the same in India.

Very true Sir, There appears to be some awareness coming in India but we mostly behave as an illiterate mass. Yes this particular service is provided by an Indian and Indians find it easy to communicate there, though there are many British operators too.

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