लंदन में इधर-उधर!

लंदन प्रवास के इस वर्ष और पिछले वर्ष के अनुभवों को मिलाकर शेयर करने के क्रम में आज मैं वह आलेख शेयर करूंगा जो मैंने पिछले वर्ष, तब लिखा था, जब मैं लौटने वाला था। इसमें कुछ बातें बदल गई हैं, जैसे मेरे बेटे का घर अब ‘कैनरी व्हार्फ’ ट्यूब रेलवे स्टेशन के बगल में है। अब यह थेम्स नदी नहीं बल्कि उससे जुड़ी एक नहर की बगल में है।

जो लोग लंदन की ज्योग्राफी समझते हों, उनके लिए बता दूं, कि मेरे बेटे का घर यहाँ पर ब्लू ब्रिज के पास, थेम्स नदी के किनारे है। यह स्थान ‘कोल्ड हार्बर’ है। जैसे यहाँ ‘व्हार्फ’ बहुत हैं, वैसे ही हार्बर भी बहुत हैं। हमको तो नदी किनारे घर होना, बहुत दिव्य लगता है, लेकिन असल में पूरा लंदन नगर ही थेम्स नदी के दोनों किनारों पर बसा है, अतः बहुत बड़ी संख्या में ऐसे मकान यहाँ हैं, जो थेम्स नदी के किनारे बने हैं। और नदी भी ऐसी जहाँ ढेर सारी छोटी-बड़ी बोट और बड़े-बड़े शिप चलते हैं।

 

यहाँ हमारे घर के पीछे ही नदी में घुमाव है और नदी के इस अर्द्ध चंद्राकार गोले में दूसरी तरफ, जहाँ एक टापू जैसा बन गया है, वहाँ नदी के बीच ओ-2 होटल और ईवेंट प्लेस है। वहाँ पर ही रोप वे पर आकर्षक ट्रॉली चलती है, जिसको एमिरेट्स एयरलाइंस द्वारा संचालित किया जाता है और उसको इस नाम से ही जाना जाता है। हाँ तो इस घुमाव वाले क्षेत्र में जब कोई बड़ा शिप आ जाता है तब दो छोटी नांवों द्वारा खींचकर उसे घुमाव वाले क्षेत्र से बाहर निकाला जाता है, वैसे भी ट्रैफिक सुरक्षा की दृष्टि से शायद यह सहायता नगर क्षेत्र में दी जाती है।

यही कारण है कि जब हमारे घर के पीछे नदी के घुमाव में कोई बड़ा जहाज आता है तो उसके बाहर निकलने तक हम उसको बहुत पास से अच्छी तरह देख पाते हैं। अभी दो दिन पहले ही एक बड़ा शिप ‘वाइकिंग’ यहाँ से वापस लौटा और उससे दो दिन पहले वह आया था। घर में बैठकर ही ढेर सारी नावों और बड़े शिप को देखना, यहाँ पर हुआ एक नया अनुभव है।

 

हाँ तो लंदन में जहाँ हम रह रहे हैं, वहाँ से मेरी पैदल यात्रा के दो छोर ‘कैनरी व्हार्फ’ ट्यूब स्टेशन और ‘आइलैंड गार्डन’ स्टेशन हैं। जी हाँ कभी मैं ‘वाक’ के लिए ‘कैनरी व्हार्फ’ ट्यूब स्टेशन की तरफ निकल जाता हूँ और कभी ‘आइलैंड गार्डन’ स्टेशन की तरफ! कैनरी व्हार्फ की तरफ जाता हूँ तो बगल में ही इतनी अंडरग्राउंड मार्केट ‘कैनाडा स्क्वेयर’ आदि-आदि हैं, ऐसे कि वहाँ कभी-कभी रास्ता भूल जाता हूँ। दूसरी तरफ ‘आइलैंड गार्डन’ की तरफ ‘वॉक’ को कुछ और लंबा करता हूँ तो अंडरग्राउंड टनेल से नदी के पार ‘ग्रीनविच’ क्षेत्र में चला जाता हूँ, जहाँ ‘कट्टी सार’ नामक शिप प्रदर्शनी के रूप में खड़ा है और उसके पास ही ‘ग्रीनविच वेधशाला’ भी है और रानी का एक महल वहाँ भी है।

ये कुछ स्थान, कुछ नाम जो यहाँ से जाने के बाद सिर्फ याद रह जाएंगे। नाम याद रह जाएं इसलिए यहाँ लिख भी दिया।

 

एक बात और शेयर करना चाहूंगा, ये तो हम जानते हैं कि आज की तारीख में, अधिकतर अखबारों की कमाई उस पैसे से नहीं होती, जो हम अखबार खरीदने के लिए देते हैं। असल में अखबार के लिए अगर हम 1 रुपया देते हैं तो उस पर खर्च 10 रुपए आता है। भारत में हम एक ‘टोकन’ राशि अखबार के लिए देते हैं। कमाई तो अखबार की विज्ञापनों से होती है। यहाँ ब्रिटेन और शायद पश्चिम के और देशों में भी, प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर अखबार रखे रहते हैं और आप वहाँ से अखबार उठाकर ले जा सकते हैं। यहाँ उसके लिए कोई दाम नहीं देना होता।

यहाँ पर ग्रोसरी स्टोर में भी सब कुछ ऑटोमेटिक है। स्कैनिंग मशीनें लगी हैं, आपने जो सामान खरीदने के लिए चुना है, उसको स्कैन कीजिए और कार्ड से अथवा नकद भी भुगतान करके उनको ले जा सकते हैं। आपको स्टोर के किसी व्यक्ति से मदद लेने की आवश्यकता नहीं है, यदि आप स्वयं ऐसा कर पाते हैं तो!

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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4 thoughts on “लंदन में इधर-उधर!”

  1. Nice post. As I said before London is a very user friendly city. I am amazed so many ships come through Thames, but we have never heard of a flood in London. Why can we not use similar approach in India?

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    • Very true, here boundaries of houses and the river are common and there are no occasions when people are asked to vacate. There are so many canals drawn from Thames throughout the city, that might be reducing the pressure and perhaps the discharge of water is not so dangerous as in India, no big mountains I think, though I do not know much about that.

      Reply

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