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इंग्लैंड का टॉवर ऑफ लंदन!

इस वर्ष का लंदन प्रवास भी अब संपन्न होने को है। वास्तव में यह अंतिम सप्ताहांत है लंदन में इस बार के डेरे का! इस क्रम में आज हम जहाँ घूमने गए वह था- ‘ टॉवर ऑफ लंदन’ जिसे विश्व धरोहरों अर्थात ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह ‘टॉवर ब्रिज’ की बगल में ही है, जहाँ हम कई बार गए हैं और इसके अंदर से ‘टॉवर ब्रिज’ बहुत अच्छा दिखाई देता है। आज विशेष बात यह रही कि हमने ‘टॉवर ब्रिज’ को खुलते हुए भी देखा। मैं यह बात दोहरा दूं कि इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना ‘टॉवर ब्रिज’ कुछ खास समयों पर खुल जाता है, अर्थात इसके बीच के भाग के दोनो हिस्से ऊपर उठ जाते हैं, जिससे ज्यादा ऊंचाई वाले शिप वहाँ से निकल सकते हैं।

 

 

खैर आज बात ‘ टॉवर ऑफ लंदन’ की कर रहे हैं, जैसा मैंने कहा कि ‘विश्व धरोहरों’ में शामिल यह विशाल किला इतिहास के अनेक स्वर्णिम और काले अध्यायों का गवाह रहा है। वहाँ पर जो लोग गाइड के रूप में बड़ा ही रोचक वर्णन इस ऐतिहासिक धरोहर का करते हैं, वे भी पूर्व-सैनिक होते हैं और उनसे इसके बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। यहाँ कितने ही राजा, रानियां सत्तारूढ़ रहे, कितने ही लोगों को यहाँ मृत्युदंड दिया गया आदि-आदि। वैसे इसका निर्माण सन 1078 में लॉर्ड विलियम ने कराया था।

 

 

 

यहाँ पर सत्तारूढ़ रही रानियों, सम्राटों आदि के आकर्षक मुकुट, उनमें जड़े हीरे आदि, जिनमें भारत का कोहिनूर हीरा भी शामिल है, ये सब यहाँ प्रदर्शित सामग्री में शामिल थे, जिनको देखकर आंखें चकाचौंध होकर रह गईं। जहाँ अनेक ताज हीरों से जड़े और स्वर्ण-मंडित पोशाकें वहाँ सजी हैं वहीं खाने-पीने के बर्तन, विशाल थालियां, शराब के टब, यहाँ तक कि विशाल नमकदानियां आदि भी, सब सोने की बनी हुईं। दिक्कत ये है कि वहाँ उस भाग में फोटो खींचने की अनुमति नहीं है, बस जो आपने देखा है वह आपको ही मालूम है, कितना आप बता पाएंगे, यह आपकी क्षमता पर निर्भर है, लेकिन इतना कह सकते हैं कि बड़े से बड़ा पूंजीपति भी इतनी संपदा इकट्ठी नहीं कर सकता, और सोने के इतने भारी बर्तनों को उठाता कौन होगा! और हाँ शाही तलवारें भी तो रत्नजडित हैं।

 

इन महलों में जहाँ अपार ऐश्वर्य की झलक है, वहीं अत्याचार के धब्बे भी बहुत गहरे हैं, अनेक लोग, जिनमें सैनिक, पादरी और यहाँ तक कि राजकुमार और राजकुमारी भी शामिल रहे हैं, उनको यहाँ मृत्युदंड दिया गया और उनमें से अनेक के बारे में यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनको क्यों मारा गया।

 

जो भी हो यह किला ब्रिटिश रॉयल्टी के गौरवशाली और अन्यथा वाली श्रेणी में आने वाले इतिहास की एक अच्छी-खासी झलक देता है। यहाँ मृत्युदंड को कार्यान्वित करने वाले एक जल्लाद के बारे में गाइड महोदय बता रहे थे कि वह ‘पार्ट टाइम एग्जीक्यूटर’ और फुल-टाइम शराबी था, शायद ऐसा काम करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी भी हो जाता है।

 

वहाँ एक व्यक्ति कुछ अलग ही किस्म का वाद्य बजा रहा था, जो देखने में इकतारे जैसा था लेकिन वह उसको बजाने के लिए गोलाई में लीवर जैसा घुमा रहा था और उसकी आवाज बहुत ही मधुर आ रही थी। यह कलाकार भी काफी लोगों को आकर्षित कर रहा था। वैसे तो वहाँ दीवारों पर बनाए गए बंदर आदि भी लोगों को आकर्षित कर रहे थे।

 

यहाँ के रहस्यों में सात विशालकाय काले कौवे ‘रैवेन’ भी शामिल हैं, जिनके बारे में कभी कहा गया कि वे काम में बाधा डालते हैं, लेकिन फिर ये बताया गया कि जब तक वे रहेंगे तब तक ही ये परिसर और राजसत्ता भी सलामत रहेंगे। वैसे तो उनको मांस, चूहे आदि खिलाए जाते हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि उनको इंसान की उंगलियां खाना बहुत अच्छा लगता है।

 

यह भी कहा जाता है कि यहाँ अतृप्त आत्माएं काफी घूमती रहती हैं, अब उनसे मिलने के लिए तो कभी रात में चोरी-छिपे यहाँ का दौरा करना होगा। वैसे हमने वहाँ शाही महल और शाही पलंग का भी नज़ारा लिया। यह एक ऐसा परिसर है जहाँ महल और कारागार दोनो थे, जहाँ ऐश्वर्य और नर्क की यातना दोनो ही भरपूर रही हैं।

 

इसके कुछ प्रमुख भाग हैं- क्राउन ज्वेल्स- जहाँ पूरी धन-संपदा प्रदर्शित है, व्हाइट टॉवर, ब्लडी टॉवर, ट्रेटर्स गेट, चैपल रॉयल आदि-आदि।

 

कहा तो बहुत कुछ जा सकता है, लेकिन अभी इतना ही कहूंगा कि आप लंदन आते हैं तो आपको यह ‘विश्व धरोहर’ का दर्जा प्राप्त परिसर भी अवश्य देखना चाहिए।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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2 replies on “इंग्लैंड का टॉवर ऑफ लंदन!”

London has a lot of living history. There is an area by Thames, probably close to Tower Bridge, where one of the kings. Prince Edward may be, was made to walk on foot to his guillotine or gallows. I am poor with historical details. But I remember tour guide mentioning it. Nice description.

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