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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में -‘ताशकंद फाइल्स’

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का 28 नवंबर को समापन हो गया। ‘IFFI@50’ में फिल्मों के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

इसी क्रम की एक कड़ी के रूप में प्रोड्यूसर शरद पटेल की फिल्म ‘ताशकंद फाइल्स’ को इस समारोह में काफी प्रशंसा प्राप्त हुई।

शरद पटेल की इस फिल्म को 50वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव में विशेष प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया गया था। फिल्म का यह प्रदर्शन ‘हाउस फुल’ रहा और दर्शकों ने फिल्म को काफी सराहा। यह फिल्म वर्ष 2019 की सफलतम फिल्मों की श्रेणी में शामिल है।

यह फिल्म अप्रैल 2019 में रिलीज़ हुई थी तथा भारतवर्ष में और विदेशी छविगृहों में यह लगातार 100 दिनों तक प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म को अभी भी, आईएफएआई-2019 के दौरान प्रदर्शित किए जाने पर दर्शकों से बहुत सराहना प्राप्त हुई। श्री शरद पटेल दर्शकों के इस उत्साह को देखकर भावविभोर हो गए और उन्होंने कहा कि अच्छा होता कि फिल्म की पूरी टीम इस अवसर पर उपस्थित होती और इस रिस्पांस का आनंद लेती।

 

 

श्री शरद पटेल एसपी सिनेकॉर्प के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं और उन्होंने कुछ ऐसी फिल्में प्रोड्यूस की हैं जिनको बहुत प्रशंसा प्राप्त हुई है, जैसे ‘बुद्धा इन ट्रैफिक जाम’, और अत्यंत सफल गुजराती फिल्म- ‘छेल्लो दिवस’, वे हाल ही में अपनी नए गुजराती प्रोडक्शन ‘विक्किडा नो वर्घोडो’ के लिए चर्चा में रहे हैं, जिसमें गुजराती फिल्मों के सुपरस्टार मल्हार ठक्कर नायक की भूमिका निभा रहे हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त निर्देशक द्वय- राहुल भोले और विनीत कनौजिया इसका निर्देशन कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट का विवरण तथा चित्र- बॉलीवुड प्रैस एंड मीडिया फोटोग्राफर- श्री अली कबीर (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव के अवसर पर पणजी, गोवा में सजावट

 

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 का आज 28 नवंबर को अंतिम दिन है। ‘IFFI@50’ में फिल्म के शौकीन लोगों को अनेक श्रेष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फिल्में देखने को मिलीं।

 

 

इस अवसर पर पणजी, गोवा में आने वाले मेहमानों को लुभाने और इस अवसर को सेलीब्रेट करने के लिए बहुत सुंदर सजावट की जाती है, जिसमें इस उत्सव के प्रतीक ‘गोल्डन पीकॉक’ को अनेक स्थानों पर लगाया जाना, अनेक स्थानों पर ‘ओपन एयर फिल्म शो’ आयोजित किया जाना, सड़क के किनारे कलाकारों की प्रस्तुतियां, कलाकृतियों के स्टॉल आदि लगाया जाना भी शामिल होता है।

इस अवसर पर कला अकादमी और ‘आइनॉक्स थियेटर’ को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था।

 

वैसे तो बहुत कुछ है जो शेयर किया जा सकता है, बस दो चित्र और,

 

आज बस इस अवसर पर की गई सजावट की कुछ झलकियां प्रस्तुत कर रहा हूँ।

नमस्कार।

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गुनगुनाती रही वेदना!

आज फिर से हिंदी काव्य मंचों के एक पुराने लोकप्रिय हस्ताक्षर- स्व. गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। गीत स्वयं अपनी बात कहता है, इसलिए मुझे ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं, लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-

 

 

तुम जलाकर दिये, मुँह छुपाते रहे, जगमगाती रही कल्पना।
रात जाती रही, भोर आती रही, मुसकुराती रही कामना।।

 

चाँद घूँघट घटा का उठाता रहा,
द्वार घर का पवन खटखटाता रहा।
पास आते हुए तुम कहीं छुप गए,
गीत हमको पपीहा रटाता रहा।
तुम कहीं रह गये, हम कहीं रह गए, गुनगुनाती रही वेदना।
रात जाती रही, भोर आती रही, मुस्कुराती रही कामना॥

 

तुम न आए, हमें ही बुलाना पड़ा,
मंदिरों में सुबह-शाम जाना पड़ा।
लाख बातें कहीं मूर्तियाँ चुप रहीं,
बस तुम्हारे लिए सर झुकाता रहा।
प्यार लेकिन वहाँ एकतरफ़ा रहा, लौट आती रही प्रार्थना।
रात जाती रही, भोर आती रही, मुसकुराती रही कामना॥

 

शाम को तुम सितारे सजाते चले,
रात को मुँह सुबह का दिखाते चले।
पर दिया प्यार का, काँपता रह गया,
तुम बुझाते चले, हम जलाते चले।
दुख यही है हमें तुम रहे सामने, पर न होता रहा सामना।
रात जाती रही, भोर आती रही, मुसकुराती रही कामना॥

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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छोड़ जाएंगे ये जहाँ तन्हा!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-

 

 

जीवन के जो अनुभव सिद्ध सिद्धांत हैं, वही अक्सर कविता अथवा शायरी में भी आते हैं, लेकिन ऐसा भी होता है कि कवि-शायर अक्सर खुश-फहमी में, बेखुदी में भी रहते हैं और शायद यही कारण है कि दिल टूटने का ज़िक्र शायरी में आता है या यह कहा जाता है-

मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिए, मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो!

अब हर समय व्यावहारिक बना रहे तो कवि-शायर क्या हुआ, सामान्य जीवन में, सभी लोग वैसे भी कहीं न कहीं धोखा खाते ही हैं और कुछ लोग जो ज्यादा भरोसा करने वाले होते हैं, वो खाते ही रहते हैं।

इसीलिए शायद कविवर रवींद्र नाथ ठाकुर ने लिखा था-

जदि तोर डाक सुनि केऊ ना आशे, तबे एकला चलो रे!

इसी बात को एक हिंदी फिल्मी गीत में बड़ी खूबसूरती से दोहराया गया है-

चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा राही, चल अकेला।

हजारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते,
यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते,
यहाँ पूरा खेल अभी जीवन का, तूने कहाँ है खेला।

 

जगजीत सिंह जी की गाई एक गज़ल है, शायर शायद बहुत मशहूर नहीं हैं- अमजद इस्लाम ‘अमजद’, इस गज़ल में कुछ बहुत अच्छे शेर हैं जिनको जगजीत जी ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में प्रस्तुत किया है-

चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले
कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले।

फस्ल-ए-गुल आई है फिर आज असीराने वफा
अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले।

दिल ने इक ईंट से तामीर किया ताजमहल
तूने इक बात कही, लाख फसाने निकले।

दश्त-ए-तन्हाई-ए-हिजरा में खड़ा सोचता हूँ
हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले।

आज यही भाव मन पर अचानक छा गया, बड़ा सुंदर कहा गया है इस गज़ल में, खास तौर पर आखिरी शेर में- अकेलेपन के जंगल में खड़ा हुआ मैं सोचता हूँ कि कैसे लोग थे जो मेरा साथ निभाने चले थे!

जीवन में जो बहुत से रंग-बिरंगे भावानुभव होते हैं, उनमें से यह भी एक है और यह काफी बार सामने आने वाला भाव है। और यह ऐसा भाव है जिसे मीना कुमारी जैसी महान कलाकार को भी भरपूर झेलना पड़ा है। उनके ही शब्दों मे आइए पढ़ते हैं-

चांद तन्हा है आस्मां, तन्हा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तन्हा।

बुझ गई आस, छुप गया तारा,
थरथराता रहा धुआं तन्हा।

ज़िंदगी क्या इसी को कहते हैं,
जिस्म तन्हा है और जां तन्हा।

हमसफर कोई गर मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे कहाँ तन्हा।

जलती-बुझती सी रोशनी के परे,
सिमटा-सिमटा सा एक मकां तन्हा।

राह देखा करेगा सदियों तक,
छोड़ जाएंगे ये जहाँ तन्हा।

तन्हाई, अकेलापन, बेरुखी- ये तो सबको झेलने पड़ते हैं, लेकिन मीना कुमारी जी जैसा कोई महान कलाकार ही यह दावा कर सकता है कि ‘छोड़ जाएंगे ये जहाँ तन्हा’ ।

नमस्कार।

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कठोर दयालुता- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Strong Mercy’ का भावानुवाद-

 

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 

 

कठोर दयालुता

 

मेरी इच्छाएं बहुत हैं और मेरी पुकार अति कातर है,
परंतु हमेशा तुमने मेरी रक्षा की है अपने कठोर इंकार से;
और यह कठोर उदारता मेरे जीवन में गहरे, बहुत गहरे पैठ गई है।

 

दिन प्रतिदिन तुम मुझे अपने दिए हुए उन सामान्य परंतु महान उपहारों के योग्य बनाते जाते हो,
जो तुमने मुझे बिना मांगे ही प्रदान किए हैं- यह आकाश और प्रकाश, यह शरीर और
यह मस्तिष्क—और इस प्रकार तुमने मुझे अत्यधिक इच्छाओं के खतरों से बचा लिया है।

 

ऐसे भी अवसर आए हैं जब मैं सुस्ती से पड़ा रहा हूँ,
और ऐसे भी जब मैं अचानक जागा हूँ और अपने लक्ष्य को खोज में तेजी से दौड़ा हूँ;
परंतु तुमने निर्दयतापूर्वक स्वयं को मुझसे छिपा लिया है।

 

दिन प्रतिदिन तुम मुझे इस योग्य बना रहे हो कि तुम मुझे पूरी तरह स्वीकार कर सको,
इसके लिए तुम हमेशा बार-बार, इंकार कर देते हो, जिससे मैं अनिश्चित इच्छाओं के कारण होने वाले संकट से बचा रहूं।

 

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

Strong Mercy

 

My desires are many and my cry is pitiful,
but ever didst thou save me by hard refusals;
and this strong mercy has been wrought into my life through and through.

 

Day by day thou art making me worthy of the simple,
great gifts that thou gavest to me unasked—this sky and the light, this body and the
life and the mind—saving me from perils of overmuch desire.

 

There are times when I languidly linger
and times when I awaken and hurry in search of my goal;
but cruelly thou hidest thyself from before me.

 

Day by day thou art making me worthy of thy full acceptance by
refusing me ever and anon, saving me from perils of weak, uncertain desire.

.
-Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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Talking about facts!

We often add a term ‘factually speaking’ to underline authenticity of what we are saying. But is there anything  which we can highlight as fact!

 

 

When we start learning, we are told that there are some universal facts, like Sun rises in the east and in the evening it drops (sets) in the west. But is it true? To what we can refer as more factual information is that Sun neither rises nor drops. It is our Earth which takes rounds around the Sun and the Moon takes rounds of our planet earth. So in the very beginning of our learning we accept a false information as a ‘universal fact or truth’!

We live in a very small part of the universe and our knowledge is very limited and there have been so many things which we believed in one way earlier but now we have accepted that it was wrong.

In our scriptures we learn one thing- ‘Brahma satyam, Jagat mithya’. Meaning that only God almighty is true, this world is just an illusion. Some saints explain it in this way- what we see while sleeping is dream of one type, but what we see and feel while we consider ourselves to be awake, is also another type of dream only.

Anyway I would not go that far in the field of philosophy. There are several films in which it has been very clearly depicted that people see a little and imagine a lot to weave a story in their minds, and they consider it to be true. The more judgmental one is, the more he or she can depend on imagination than facts. We need to check what we call facts and should check them to the extent possible. Though it is not always possible to get all the facts.

So many people in this world love to remain in a world of their own thoughts, own imaginations rather than facing the hard facts. Otherwise also facts are also conditional. What could be a fact for me, may not be a fact for you. These also depend on our expectations and our interaction with the environment.
There is a story about King Akbar perhaps, this story also might have been associated with some other kings etc. by people to drive home their point.

So the story is that the King took feedback from the barber, who came for his haircut, shaving etc. and depended a lot on his feedback, saying that he is a common man and tells about the condition of common people.

So to get a type of impression from that ‘common man’, Birbal once put some Gold Biscuits in his house. The next time when Akbar took feedback from that ‘common man’ he told that everybody in the kingdom is happy and everybody has some gold at least with him.

The next day Birbal got the Gold biscuits removed from his house, and the feedback that the King got from him was, ‘Nobody here is safe, there are thefts, robberies and it is a very dangerous situation for the common people.’

I think this is a very nice example of how people talk about facts. Sometimes it is also said that people do not have enough courage to face the facts.

If we talk politics, we discuss the present government in the country, there are a lot of people who feel that the present government is far better than the corrupt congress government. For some people Mr. Modi is a devoted person making all efforts for the progress of the country but for some he is the villain number one. Is there anything about him on which Mr. Arnab Goswami and his likes can agree with  Mr.Vinod Dua, Ravish Kumar and their likes.

 

So actually we also maintain colonies of thoughts, of assumed facts based on our interpretations , ideologies and we are not able to enjoy and accept pure facts today.

This is my humble submission on the #IndiSpire prompt- There are no facts, only interpretations. #NoFacts

Thanks for Reading.

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फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज

पणजी, गोवा में चल रहे 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 में आज 23 नवंबर की खबर यह है कि फिल्म स्टार श्री अनिल कपूर आज कला अकादमी के निकट इंटरएक्टिव डिजिटल एग्जिबिशन ‘IFFI@50’ देखने के लिए गए। प्रस्तुत हैं इस अवसर के कुछ चित्र।

चित्र और विवरण बॉलीवुड प्रेस/मीडिया फोटोग्राफर- श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

नमस्कार।

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पणजी में फिल्म मेले- आईएफएफआई-2019 का दूसरा दिन

एक बार फिर से गोवा फिल्म फेस्टिवल, IFFI-2019 के बारे में लिख रहा हूँ, क्योंकि यह मेरा स्थान है और अपने निवास क्षेत्र के बारे में ऐसी गौरव भरी बात लिखना अच्छा लगता है।

 

जैसा मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, आजकल पणजी, गोवा में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म उत्सव, आईएफएफआई-2019 चल रहा है। इस उत्सव के उद्घाटन समारोह के बारे में मैंने अपनी पिछली पोस्ट में लिखा था, अब इसी उत्सव से संबंधित कुछ और जानकारी दे रहा हूँ।

एशिया के इस सबसे बड़े फिल्म समारोह के 50वें आयोजन में, जैसी कि घोषणा की गई थी, देश के सर्वमान्य सुपर स्टार, दादासाहब फाल्के सम्मान तथा अन्य अनेकानेक पुरस्कारों से अलंकृत, हिंदी फिल्म जगत के गौरव- श्री अमिताभ बच्चन की फिल्मी यात्रा की उनकी फिल्मों के माध्यम से प्रस्तुति अर्थात- रैट्रोस्पेक्टिव आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन पणजी की कला-अकादमी में किया जा रहा है, इसमें अमिताभ जी की अनेक प्रतिनिधि फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।

 

 

श्री अमिताभ बच्चन ने कल कला अकादमी, पणजी, गोवा में  रैट्रोस्पेक्टिव का उद्घाटन किया। इस अवसर बोलते हुए श्री बच्चन ने कहा – मैं अत्यंत अभिभूत हूँ और भारत सरकार को इसके हृदय से लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं ऐसा महसूस करता हूँ कि मैं इस सम्मान के योग्य नहीं हूँ, लेकिन मैं विनम्रतापूर्वक इसे स्वीकार करता हूँ।

इस फिल्म उत्सव के 50 वें आयोजन के अवसर पर उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार को यह आयोजन इतनी भव्यता के साथ करने के लिए बधाई देता हूँ। प्रतिवर्ष हम पाते हैं कि इसमें भाग लेने वाले प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ती जाती है और एक साथ हमें अनेक प्रकार की फिल्में मिलती हैं, जिससे हम विश्व भर की सृजनात्मक फिल्मों में से अपने देखने के लिए कुछ फिल्में चुन सकते हैं।”

श्री बच्चन ने कहा कि फिल्मों की दुनिया विश्व व्यापी है और यह भाषा और क्षेत्र के बंधन तोड़ देती हैं। उन्होंने कहा कि जब हम सिनेमा हॉल में बैठते हैं तब हम अपनी बगल में बैठे किसी व्यक्ति की जाति, धर्म, रंग नहीं पूछते हैं। हम सब उसी फिल्म का एक साथ आनंद लेते हैं, उस फिल्म के दृश्यों को देखकर एक साथ हंसते हैं और एक साथ रोते हैं, एक जैसी भावनाएं व्यक्त करते हैं। यह एक अत्यंत सशक्त माध्यम है और उन्होंने आशा व्यक्त की यह माध्यम पूरी निष्ठा से अपना काम करता रहेगा।

उन्होंने एक शांतिपूर्ण और प्रेम से भरी दुनिया बनाए रखने के लिए फिल्मों की भूमिका का उल्लेख किया और आशा व्यक्त की कि वे अपनी इस भूमिका को निरंतर निभाती रहेंगी।

श्री बच्चन का गोवा से खासा जुड़ाव रहा है और उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनकी पहली फिल्म की शूटिंग भी गोवा में हुई थी। उन्होंने कहा कि गोवा आने पर उनको हमेशा ऐसा लगता है जैसे वे अपने घर आये हों। ‘यहाँ मुझे अनेक अवसर मिले हैं और लोगों का बहुत प्यार मिला है’, उन्होंने कहा।

श्री बच्चन की फिल्मों के रैट्रोस्पेक्टिव के अंतर्गत जो फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी उनमें- ‘पा’, शोले, दीवार, ब्लैक, पीकू और बदला शामिल हैं।

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इसके बाद मैं यहाँ समारोह में प्रदर्शित की जा रही एक फिल्म ‘दा हंड्रेड बक्स’ की संक्षिप्त जानकारी दे रहा हूँ।

 

 

यह मोहिनी की कहानी है, मोहिनी और उसके ऑटो चालक अब्दुल की यह एक रात की कहानी पैसे के लिए ग्राहक खोजने में पूरी रात के उनके संघर्ष को प्रदर्शित करती है । आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिल्म के निर्देशक- दुष्यंत सिंह, जो एक संगीतकार और गायक भी हैं, ने बताया कि यह फिल्म एक बहुत ही संवेदनशील विषय ‘वेश्यावृत्ति’ पर आधारित है, जिसे अक्सर दुनिया के सबसे पुराने पेशे के रूप में वर्णित किया जाता है, लेकिन समाज ने हमेशा वेश्याओं का अपमान किया है। फिल्म जनवरी 2020 में रिलीज़ होगी और पूरे भारत में प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म में पहली बार किसी अभिनेत्री ने इस विषय में एक शक्तिशाली प्रस्तुति दी है।

 

फिल्म की अभिनेत्री कविता जो एक मॉडल है ने बताया कि यह एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली फिल्म है और करियर की शुरुआत में उन्हे मुख्य किरदार के रूप में एक फिल्म मिली और यह फिल्म महिला प्रधान है । आमतौर पर यह एक पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की स्थितियों को चित्रित करती है। क्योंकि यह फिल्म उद्योग में उसकी शुरुआत है और इस तरह की भूमिका!  एक लड़की होना मेरे लिए भी सौभाग्य की बात है। कविता के अनुसार, निर्देशक दुष्यंत एक अद्भुत निर्देशक हैं और उनके साथ मेरे लिए एक अभिनेत्री के रूप में काम करना बहुत अच्छा है क्योंकि वह एक परिवार की तरह सभी के साथ व्यवहार करते हैं। यह एक कलाकार के रूप में उनके साथ काम करने के लिए बहुत आभारी हैं। फिल्म के निर्माता रजनीश राम पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुझे फिल्म का विषय पसंद आया! इतना कि एक निर्माता के रूप में मैंने तुरंत हां कह दिया क्योंकि ऐसी चीजें और विषय मिलना मुश्किल है जो महिलाओं के दर्द और संघर्ष को इतनी खूबसूरती से बयान कर सकते हैं। मेरे अनुसार फिल्म से जुड़े सभी अभिनेताओं और तकनीशियनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। दुष्यंत सिंह के साथ अपनी पुरानी दोस्ती के कारण  एक निर्देशक के रूप में उनसे अच्छा तालमेल रहा और फिल्म में एक अभिनेत्री के रूप में कविता के अभिनय से भी बहुत प्रभावित हुए हैं क्योंकि उनकी कड़ी मेहनत के कारण यह अनुमान लगाना कठिन है कि यह उनकी  पहली फिल्म है,  उन्होंने अपना किरदार इतनी अच्छी तरह से निभाया। निर्देशक दुष्यंत सिंह ने फिल्म के अन्य पात्रों के बारे में बताया जो दिनेश बावरा (अभिनेता और हास्य कवि), ज़ैद शेख – अभिनेता हैं। निशा गुप्ता अभिनेत्री ने फिल्म में शानदार काम किया है। चूंकि पूरी फिल्म रात में ही शूट की गई थी, इसलिए फिल्म का पूरा लुक बहुत यथार्थवादी लग रहा है, फिल्म में संगीत संतोष सिंह का है। फिल्म की पटकथा सलीम द्वारा लिखी गई है। फिल्म के अन्य निर्मा सहायक संदीप पुरी, विभव तोमर, प्रतिमा तोतला और रितु सिंह हैं।

 

 

इस आलेख के साथ दिए गए सभी छायाचित्र तथा विवरण बॉलीवुड के फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव) के सौजन्य से।

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार।

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गोवा का वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला- IFFI 2019

गोवा भारत का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहाँ देश-विदेश से सैलानी आकर्षक समुद्र-तटों को देखने और प्रदूषण मुक्त वातावरण में फुर्सत के कुछ पल बिताने के लिए आते हैं। विशेष रूप से जब देश के अनेक भागों में सर्दी पड़ रही होती है तब भी यहाँ पर मौसम सुहाना होता है। इस प्रकार के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों को कुछ और गतिविधियां भी आकर्षित करती हैं। गोवा के मामले में ऐसी ही एक गतिविधि है अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मेला अर्थात IFFI, जिसका कल 20 नवंबर को उद्घाटन हुआ।

 

 

आईएफएफआई-2019 का उद्घाटन कल पणजी, गोवा में बड़ी धूमधाम के साथ हुआ। इस फिल्म मेले के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने सिनेमा जगत की दो महान हस्तियों- श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत की गौरवशाली उपस्थिति में किया, जिनको फिल्म जगत में एक लंबी पारी पूरी करने के अवसर पर सम्मानित भी किया गया। अमिताभ बच्चन जी ने अपने फिल्मी करियर के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और श्री रजनीकांत भी लगभग इतने ही समय से लोगों को अपने अभिनय से चमत्कृत कर रहे हैं।

 

नौ दिन तक चलने वाले इस समारोह में 76 देशों की 200 से अधिक फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी तथा सिनेमा प्रेमियों के लिए अपनी रुचि के अनुसार श्रेष्ठतम फिल्में देखने का यह सुनहरा अवसर है। इस बार के फिल्म मेले में रूसी फिल्मों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।

 

 

इस फिल्म मेले के भव्य उद्घाटन समारोह का संचालन, श्री अमिताभ बच्चन और श्री रजनीकांत जैसी दिव्य हस्तियों की उपस्थिति में प्रमुख फिल्मी व्यक्तित्व श्री करन जौहर ने किया, और इन विशिष्ट अतिथियों द्वारा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर के साथ मिलकर, इस समारोह के प्रारंभ की घोषणा की गई।

 

 

इस समारोह में श्री रजनीकांत को भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए एक विशेष पुरस्कार ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ से सम्मानित किया गया, जो इस 50 वें फिल्म उत्सव से ही प्रारंभ किया गया है। अपने योगदान से फ्रेंच सिनेमा की पहचान बन चुकी अभिनेत्री- सुश्री इसाबेले अन्ने मेडेलीने हुपर्ट को इस अवसर पर ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट एवार्ड’ प्रदान किया गया।

 

 

इस अवसर पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है कि अधिक से अधिक विदेशी निर्माता, बिना किसी असुविधा के भारत में अपनी फिल्मों की शूटिंग कर पाएं और इस प्रकार हमारे देश का प्रकृतिक सौंदर्य पूरी दुनिया तक पहुंचे। अब उन निर्माताओं को एक बिंदु से ही शूटिंग की अनुमति मिल पाएगी और अनेक स्थानों पर नहीं भटकना पड़ेगा। इस प्रकार उन निर्माताओं को भी आसानी होगी और गोवा, लेह-लद्दाख, अंडमान निकोबार जैसे स्थानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

 

 

मंत्री जी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, संगीत तथा फिल्में हमारी मृदुल शक्ति हैं और हमें इनको आगे बढ़ाना चाहिए। हर फिल्मी चरित्र हमारे मस्तिष्क पर लंबे समय तक बनी रहने वाली छाप छोड़ता है और उसमें हमारे विचार तथा हमारा मूड बदलने की शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्मों के दर्शक लगातार बढ़ रहे हैं और आज दुनिया भर में भारतीय फिल्में देखी जाती हैं। मंत्री जी ने कहा कि इस समारोह में दुनिया भर की अनेक अच्छी फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी और यह गोवा के पूर मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर जी के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि होगी।

 

 

श्री रजनीकांत जी ने ‘आइकन ऑफ गोल्डन जुबिली एवार्ड’ स्वीकार करते हुए, श्री अमिताभ बच्चन जी के कर कमलों से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने यह पुरस्कार उन सभी निर्माताओं, निर्देशकों और तकनीशियनों को समर्पित किया, जिनके साथ उन्होंने फिल्मों मे काम किया है तथा अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त किया ।

श्री अमिताभ बच्चन ने अपना सम्मान किए जाने पर हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि वे आईएफएफआई के बहुत आभारी हैं  कि उनका सम्मान किया गया और उनकी फिल्मों का विशेष प्रदर्शन किया जा रहा है। श्री अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि आज फिल्में हमारे जीवन का अटूट हिस्सा बन गई हैं। गोवा में इतना विशाल फिल्म उत्सव आयोजित होने से गोवा दुनिया भर में हो रही गतिविधियों की झलक मिलती है और उनको बाहर के लोगों से मिलने-जुलने का अवसर मिलता है।

 

 

सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री अमित खरे ने इस समारोह की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी और यह बताया कि 1952 में जहाँ इसमें 23 देशों ने भाग लिया था, इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 76 हो गई है।

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन में हर प्रकार की फिल्में शामिल हैं और यह समारोह भारतीय और विदेशी निर्माताओं, कलाकारों को एक-दूसरे के निकट लाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि फिल्में समाज के दर्पण के रूप में काम करती हैं।

इस समारोह शामिल हुए कुछ प्रमुख व्यक्ति हैं- विश्व विख्यात सिनेमेटोग्राफर और आईएफएफआई इंटरनेशनल जूरी चेयरमैन- जॉन बेली, भारतीय फिल्म निर्माता और भारतीय जूरी के अध्यक्ष- श्री प्रियदर्शन और अन्य जूरी सदस्य, रूसी प्रतिनिधिमंडल की प्रामुख- मारिया लेमेशेवा और अन्य अनेक गणमान्य अतिथि इस समारोह में शामिल हुए।

इस आयोजन में इन फिल्म समारोहों को गोवा की पहचान बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर को, उनके योगदान को रेखांकित करने वाली एक लघुफिल्म के माध्यम से भावभीनी श्रंद्धांजलि दी गई। इस आयोजन में जिन प्रमुख भारतीय फिल्मी हस्तियों को सम्मानित किया गया उनमें श्री रमेश सिप्पी, श्री एन. चंद्रा, श्री पी.सी.श्रीराम शामिल थे।

समारोह में शामिल कुछ प्रमुख व्यक्तियों में केंद्रीय आयुष मंत्री- श्री श्रीपद नायक, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री- श्री बाबुल सुप्रियो, केंद्रीय फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड के अध्यक्ष- श्री प्रसून जोशी आदि शामिल थे।

इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री- श्री प्रकाश जावडेकर ने 50 वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी की। उद्घाटन में अनेक भव्य प्रस्तुतियां की गईं, जिनमें विख्यात संगीतकार एवं गायक श्री शंकर महादेवन और उनके बैंड की प्रस्तुति ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

फिल्म-समारोह का प्रारंभ इटली की फिल्म ‘डिस्पाइट द फॉग’ (कोहरे के बावज़ूद) से हुआ। इस फिल्म से जुड़े कलाकार और अन्य कर्मी भी फिल्म प्रदर्शन के अवसर पर उपस्थित थे। आईएफएफआई के इस स्वर्ण जयंती उत्सव में लगभग 7000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

इस आयोजन में 76 देशों की 200 से अधिक प्रतिष्ठित फिल्मों का प्रदर्शन होगा, रूस की फिल्मों पर इस समारोह में विशेष रूप से फोकस किया गया है और भारतीय पैनोरमा खंड में 15 नॉन-फीचर फिल्में भी प्रदर्शित की जाएंगी। ऐसी आशा की जाती है कि इस विशिष्ट समारोह में 10, 000 से अधिक सिनेमा प्रेमी भाग लेंगे और यह समारोह पणजी, गोवा में 28, नवंबर, 2019 को संपन्न होगा।
(उद्घाटन समारोह से संबंधित सभी छायाचित्र- बॉलीवुड फोटोग्राफर श्री कबीर अली (कबीर एम. लव के सौजन्य से)

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बंगलौर में एक दिन!

हैदराबाद से रात्रि में चलने वाली स्लीपर बस द्वारा बंगलौर आया, बहुत दिनों के बाद नाइट बस में यात्रा और देर रात में मिड-वे ढ़ाबे में खाना खाने का अनुभव दोहराया। एक दिन आराम करने के बाद सोचा कि बंगलौर में ही किसी स्थान पर धावा बोला जाए।
बंगलौर में स्थानीय भ्रमण के अंतर्गत मैं पहले लाल-बाग बोटेनिकल गार्डन गया, बहुत पहले यहाँ गया था, सोचा कि इस बार एक ब्लॉगर की निगाह से इस स्थान को देखा जाए।

शायद यह भारतवर्ष का पहला सुनियोजित बोटेनिकल गार्डन है, जिसकी संकल्पना और स्थापना बहुत पहले ‘हैदर अली’ के शासन काल में हुई, बाद में ‘टीपू सुल्तान’ के शासन काल में इसको और समृद्ध किया गया और बाद में ब्रिटिश शासन काल में और स्वतंत्र भारत में यह और विकसित होता गया है।

अनेक प्रजातियों के वृक्षों और फूलों की पौध और अनेक विकसित वृक्ष यहाँ पर हैं, एक योजनाबद्ध रूप से अनेक सेक्शन यहाँ बनाए गए हैं, पूरा बाग देखने के लिए काफी लंबा समय लग सकता है और यह भी डर लगा रहता है कि शायद कुछ हिस्सा छूट जाए, इसलिए बेहतर है कि आप एक बार वहाँ घुमाने वाली गाड़ी में घूम लें और जिस हिस्से में आप अधिक समय बिताना चाहें, वहाँ पैदल घूम सकते हैं, गौर से कुच चीजों को देख सकते हैं। वैसे जिन जोडों को एकांत में समय बिताने की जरूरत हो, वे तो पूरा दिन यहाँ रह सकते हैं।

 

मुझे तो पेड़ पौधों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, मुझे लग रहा था कि मेरे मित्र वसीउल्लाह खान यहाँ जाएं तो बहुत से पुराने पेड़ों को बहुत गौर से देखेंगे और शायद उनसे बात भी करते।
वैसे यहाँ ‘फ्लोरल क्लॉक’, विशाल झील तथा और भी अनेक स्थान ऐसे हैं जो बहुत आकर्षक हैं और निश्चित रूप से यह स्थान एक बार अवश्य जाने लायक है।

 

 

लाल बाग के बाद मैंने ‘बंगलौर पैलेस’ की तरफ बढ़ा। बंगलौर पैलेस में एक विशेष आयोजन देखने का अवसर मिला, वहाँ ‘टैक समिट’ नाम से टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली अनेक कंपनियों के आकर्षक स्टॉल लगे थे, जिनमें तकनीकी क्षेत्र में उनके द्वारा उठाए जा रहे नए कदमों की जानकारी दी जा रही थी और वहाँ एक तकनीकी क्विज, भी चल रही थी। वहाँ अचानक यह प्रदर्शनी देखना भी एक अच्छा संयोग था।

 

 

इसके बाद मैं बंगलौर पैलेस में गया, जो राजसी शान-ओ-शौकत का, पुराने जमाने में झांकने का एक अच्छा अवसर था। इस महल में प्राचीन आर्टिटैक्चर, आंतरिक सजावट, प्राचीन पेंटिंग्स आदि का अमूल्य खजाना मौजूद है तथा उनको देखना एक अलग ही अनुभव से गुजरना है। यहाँ 250/- प्रवेश टिकट है और मोबाइल द्वारा फोटो खींचने के लिए 300/- अलग से जमा कराने पड़ते हैं। लेकिन इस प्रकार आप एक अच्छे अनुभव से गुज़र पाते हैं और चित्रों का बहुत सुंदर कलेक्शन आपके पास हो जाता है।

 

आज की इस यात्रा में मुझे लगता है कि अधिक लिखने की जगह अधिक चित्र शेयर करना बेहतर है, लेकिन उसकी भी तो यहाँ सीमा है, कुछ चित्र यहाँ शेयर कर रहा हूँ।

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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