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धूल हूँ मैं तू पवन बसंती!

आज काफी लंबे अंतराल के बाद मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाए एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ। इस गीत को जीतेंद्र जी पर फिल्माया गया है। जीतेंद्र जी के लिए भी मुकेश जी ने बहुत से हिट गीत गाये हैं। 1969 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘धरती कहे पुकार के’ के लिए यह गीत ज़नाब मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने लिखा था और मुकेश जी ने, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी के संगीत में, अपने मधुर स्वर देकर इसे अमर कर दिया था।

एक बात और, मुकेश जी को दर्द भरे गीतों का बेताज बादशाह कहा जाता है, यह गीत भी कुछ ऐसा ही, अपनी बर्बादी का जश्न मनाने का गीत!

 

 

लीजिए प्रस्तुत हैं इस गीत के बोल-

खुशी की वो रात आ गई
कोई गीत जगने दो
गाओ रे झूम झूम,
कहीं कोई काँटा लगे
जो पग में तो लगने दो,
नाचो रे झूम झूम!

 

आज हँसूं मैं इतना कि
मेरी आँख लगे रोने
आज मैं इतना गाऊं कि
दिल में दर्द लगे होने,
मजे में सवेरे तलक
यही धुन मचलने दो,
नाचो रे झूम झूम।
गाओ रे झूम झूम॥

 

धूल हूँ मैं तू पवन बसंती
क्यों मेरा संग धरे,
मेरी नहीं तो और किसी की
बइयां में रंग भरे।
दो नैनो में आँसू लिए
दुल्हनिया को सजने दो,
नाचो रे झूम झूम।
गाओ रे झूम झूम॥

 

कहीं कोई काँटा लगे
जो पग में तो लगने दो,
नाचो रे झूम झूम।
गाओ रे झूम झूम।।

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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