तू भी हुआ रखैल — बदरा पानी दे !

जब स्व. रमेश रंजक जी के दो गीत पहले शेयर किए तो खयाल आया कि गरीब किसान की हालत को लेकर बादल से फरियाद वाला उनका गीत भी शेयर करूं। गरीब किसान का पूरा भविष्य, उसकी खेती पर और उसकी खेती वर्षा पर निर्भर होती है। इस गीत में उन्होंने बादलों को यह भी उलाहना दे दिया कि वह भी अमीरों की रखैल बन गया है और गरीब किसान का साथ नहीं दे रहा। लीजिए प्रस्तुत है ये गीत-

 

पास नहीं है बैल — बदरा पानी दे ।
ज़ालिम है ट्यूवैल — बदरा पानी दे !

 

इज़्ज़तदार ग़रीब पुकारे,
ढोंगी मारे दूध-छुआरे,
चटक रही खपरैल — बदरा पानी दे !

 

ठनगन मत दिखला मेरे भाई,
खबसूरत औरत की नाँई,
तू भी हुआ रखैल — बदरा पानी दे !

 

छोड़ पछाँही लटके-झटके,
एक बार नहला जा डट के,
तू ! ग़रीब की गैल — बदरा पानी दे !

 

ऐसी झड़ी लगा दे प्यारे,
भेद-भाव मिट जाएँ हमारे,
छूटे सारा मैल — बदरा पानी दे !

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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