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हाय रे अकेले छोड़ के जाना, और न आना बचपन का!

आज मुझे अपने परम प्रिय गायक जी का गाया, फिल्म देवर का एक गीत याद आ रहा है, जो अभिनेता धर्मेंद्र जी पर फिल्माया गया था। इस गीत को लिखा था आनंद बख्शी जी ने और रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने अपने मधुर स्वर में इस गीत को गाकर अमर कर दिया है।

गीत का विषय भी ऐसा ही है, वास्तव कुछ चीजें जो जीवन में अनमोल होती हैं, उनमें से एक है बचपन, और बचपन के अनमोल होने को इस गीत में बहुत सुंदरता में अभिव्यक्त किया गया है।

लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

 

 

आया है मुझे फिर याद वो जालिम,
गुज़रा ज़माना बचपन का,
हाय रे अकेले छोड़ के जाना
और न आना बचपन का,
आया है मुझे फिर याद वो जालिम।

 

वो खेल वो साथी वो झूले,
वो दौड़ के कहना आ छू ले,
हम आज तलक भी न भूले-
हम आज तलक भी न भूले,
वो ख्वाब सुहाना बचपन का,
आया है मुझे फिर याद वो जालिम।

 

इसकी सबको पहचान नहीं,
ये दो दिन का मेहमान नहीं-
ये दो दिन का मेहमान नहीं,
मुश्किल है बहुत आसान नहीं,
ये प्यार भुलाना बचपन का,
आया है मुझे फिर याद वो जालिम।

 

मिल कर रोयें फरियाद करें,
उन बीते दिनों की याद करें,
ऐ काश कहीं मिल जाये कोई-
ऐ काश कही मिल जाये कोई,
जो मीत पुराना बचपन का।
आया है मुझे फिर याद वो जालिम।
गुज़रा ज़माना बचपन का।

 

आज के लिए इतना ही।
नमस्कार।

*****

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