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उपहार – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘The Gift’ का भावानुवाद-

 

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता

 

उपहार

 

मैं तुम्हे कुछ देना चाहता हूँ, मेरे बच्चे, क्योंकि हम बहकर दूर चले जाएंगे
विश्व की धारा में।

 

हमारे जीवन दूर चले जाएंगे, और हमारा प्रेम भुला दिया जाएगा।
परंतु मैं इतना मूर्ख नहीं हूँ कि यह आशा रखूं, कि मैं तुम्हारा हृदय जीत पाऊंगा
अपने दिए हुए उपहारों से।

 

तुम अभी उम्र में बहुत छोटे हो, तुम्हारा मार्ग लंबा है, और हम जो प्रेम तुम पर उंडेलते हैं
उसे तुम घूंट भर पीते हो और हमसे दूर चले जाते हो।

 

तुम्हारे अपने खेल हैं और साथ में खेलने वाले भी। इसमें क्या हानि है कि यदि
तुम्हारे पास हमारे लिए समय अथवा चिंतन नहीं है!

 

बेशक हमारे पास, वृद्धावस्था में पर्याप्त फुर्सत है कि हम उन दिनों की गिनती करें,
जो बीत चुके हैं, और अपने हृदय में उस सबकी स्मृति संजो लें, जिनको हम
हमेशा के लिए खो चुके हैं।

 

नदी मंथर गति से दौड़ती है, गीत गाती हुई, सभी बाधाओं को ध्वस्त करते हुए।
परंतु पर्वत स्थिर खड़ा रहता है, और उसका पीछा करता है,
अपने प्रेम के साथ।

 

-रवींद्रनाथ ठाकुर

 

और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-

 

The Gift

 

I want to give you something, my child, for we are drifting in the
stream of the world.
Our lives will be carried apart, and our love forgotten.
But I am not so foolish as to hope that I could buy your heart
with my gifts.
Young is your life, your path long, and you drink the love we
bring you at one draught and turn and run away from us.
You have your play and your playmates. What harm is there if
you have no time or thought for us!
We, indeed, have leisure enough in old age to count the days
that are past, to cherish in our hearts what our hands have lost
for ever.
The river runs swift with a song, breaking through all
barriers. But the mountain stays and remembers, and follows her
with his love.

 

– Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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