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सहानुभूति- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Sympathy’ का भावानुवाद-

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता 

 

 

सहानुभूति

यदि मैं मात्र एक छोटा सा पिल्ला होता, आपका शिशु नहीं, तब क्या मेरी प्यारी माँ,
आप मुझे ‘नहीं’ कहतीं, यदि मैं आपकी थाली में से खाने का प्रयास करता?

 

क्या तुम मुझे दूर भगा देतीं, यह कहते हुए, “दूर भागो, तुम छोटे से
शैतान पिल्ले?”

 

तब जाओ, माँ तुम जाओ! मैं कभी नहीं आऊँगा, तुम्हारे पास, तुम्हारे बुलाने पर,
मैं तुमको अब कभी अपने हाथों से मुझे खिलाने नहीं दूंगा|

 

यदि मैं केवल एक छोटा सा हरे रंग का तोता होता, आपका बच्चा नहीं,
मेरी प्यारी माँ, तब क्या तुम मुझे जंजीर बांधकर रखतीं, जिससे मैं उड़कर दूर न चला जाऊं?

 

क्या तुम मेरी तरफ उंगली दिखाकर कहतीं, “कैसा एहसान फरामोश
अभागा पक्षी है यह! दिन-रात अपनी जंजीर में दाँत मारता रहता है?

 

फिर रहने दो माँ, जाओ माँ! मैं भागकर जंगलों में चला जाऊंगा; फिर मैं कभी भी तुम्हारी बाँहों में नहीं आऊँगा|

 

 

और अब प्रस्तुत है अंग्रेजी में वह मूल कविता, जिसका ऊपर अनुवाद प्रस्तुत किया गया है-

 

Sympathy

 

If I were only a little puppy, not your baby, mother dear, would
you say “No” to me if I tried to eat from your dish?
Would you drive me off, saying to me, “Get away, you naughty
little puppy?”
Then go, mother, go! I will never come to you when you call
me, and never let you feed me any more.
If I were only a little green parrot, and not your baby,
mother dear, would you keep me chained lest I should fly away?
Would you shake your finger at me and say, “What an ungrateful
wretch of a bird! It is gnawing at its chain day and night?”
The go, mother, go! I will run away into the woods; I will
never let you take me in your arms again.

-Rabindranath Tagore

 

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

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