Categories
Uncategorized

राहें हैं तमाशाई राही भी तमाशाई!

आज विख्यात भारतीय शायर जनाब अली सरदार जाफरी साहब की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| जाफरी साहब ने बहुत नायाब शायरी और गीत हम लोगों को दिए हैं| आपके अनेक गीत हिन्दी फिल्मों में सुपरहिट हुए हैं और इस गजल की तरह बहुत से गीत/गजलों को जगजीत सिंह जी और अन्य गायकों ने गाया है|

 

आज की यह गजल भी जगजीत सिंह साहब ने बड़े मन से गाई है| लीजिए इसका आनंद लीजिए-

 

 

आवारा हैं गलियों में मैं और मेरी तनहाई,
जाएँ तो कहाँ जाएँ ,हर मोड़ पे रुसवाई|

 

ये फूल से चेहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रस्ते,
राहें हैं तमाशाई, राही भी तमाशाई|
मैं और मेरी तन्हाई||

 

अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे
कातिल नज़र आती है दुनिया की हवा जैसे,
रोती है मेरे दिल पर बजती हुई शहनाई|
मैं और मेरी तन्हाई||

 

आकाश के माथे पर तारों का चरागाँ है
पहलू में मगर मेरे जख्मों का गुलिस्तां है,
 आंखों से लहू टपका, दामन में बहार आई|
मैं और मेरी तन्हाई||

 

हर रंग में ये दुनिया सौ रंग दिखाती है
रोकर कभी हंसती है, हंस कर कभी गाती है,
ये प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगडाई|
मैं और मेरी तन्हाई ||

 

 

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

******

Leave a Reply