Categories
Uncategorized

तुम प्राणों की अगन हरो तो!

 

एक बार फिर से आज मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक भावुकता और प्रेम से भरा गीत शेयर कर लूँ| भावुकता वैसे तो जीवन में कठिनाई से ही कहीं काम आती है, आजकल बहुत कम मिलते हैं इसको समझने वाले, परंतु कवि-गीतकारों के लिए तो यह बहुत बड़ी पूंजी होती है, अनेक गीत इसके कारण ही जन्म लेते हैं|

लीजिए प्रस्तुत है भारत भूषण जी का यह खूबसूरत गीत-

 

 

सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ
प्रिय मिलने का वचन भरो तो !

 

पलकों-पलकों शूल बुहारूँ
अँसुअन सींचू सौरभ गलियाँ,
भँवरों पर पहरा बिठला दूँ
कहीं न जूठी कर दें कलियाँ|
फूट पड़े पतझर से लाली
तुम अरुणारे चरन धरो तो !

 

रात न मेरी दूध नहाई
प्रात न मेरा फूलों वाला,
तार-तार हो गया निमोही
काया का रंगीन दुशाला|

 

जीवन सिंदूरी हो जाए
तुम चितवन की किरन करो तो !

 

सूरज को अधरों पर धर लूँ
काजल कर आँजूँ अँधियारी,
युग-युग के पल छिन गिन-गिनकर
बाट निहारूँ प्राण तुम्हारी|
साँसों की जंज़ीरें तोड़ूँ
तुम प्राणों की अगन हरो तो|

 

 

आज के लिए इतना ही
नमस्कार|

******

Leave a Reply