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देवों के देव महादेव!

मैंने पहले भी अपनी ब्लॉग पोस्ट में यह उल्लेख किया है की लॉक डाउन प्रारंभ होने के बाद हमने हॉटस्टार पर धार्मिक सीरियल – ‘देवों के देव महादेव’ देखना प्रारंभ किया था और अभी तक हम इसे देख रहे हैं| हर रोज हम 4-5 एपिसोड तो देख ही लेते हैं, और ऐसा लगता है की अभी भी इसका 20% भाग देखना बाकी है|

 

महादेव जिनको आदि-देव कहा जाता है और उनके साथ आदि-शक्ति जगदंबा पार्वती| वास्तव में कैलाश में बसने वाले महादेव – त्रिदेव के दिव्य सदस्य ऐसे हैं कि जिनके चमत्कारों का वर्णन करना बहुत कठिन है| महादेव और जगत जननी, अनेक बार अनेक रूपों में मिलते हैं| बम भोले कहे जाने वाले महादेव कभी बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं और जब रुष्ट हो जाते हैं तब त्रिदेव और सारे देवता उनको मनाने में लग जाते हैं| सभी लोग जब श्रेष्ठ वस्तुओं, सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हैं तब महादेव दुनिया के कल्याण के लिए विषपान करते हैं, और देवता लोग अमृत पाकर खुशी मनाते हैं|

देवताओं पर जब संकट आता है, तब वे महादेव की शरण में आते हैं और बाद में उनको भूल जाते हैं, अहंकार में डूब जाते हैं| इन्द्र के अहंकारी स्वभाव के अनेक उदाहरण इस कथा में आते हैं| तुलसीदास जी ने देवताओं के बारे में लिखा है-

आए देव सदा स्वारथी, बात करहीं जनु परमारथी|

महादेव के यशस्वी पुत्र- कार्तिकेय, जो देवताओं के सेनापति थे, गणेश जी, जिनको उनके श्रेष्ठ गुणों और बुद्धिमत्ता के कारण- प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त हुआ| इनकी पुत्री – अशोक सुंदरी, जिनके पति नहुष देवराज इन्द्र का आसन भी प्राप्त कर लेते हैं लेकिन अपने अहंकार के कारण एक ऋषी से श्राप पाकर सर्प बन जाते हैं|

ऐसे अनेक पौराणिक पात्र हैं जिनकी कथाएँ इस विराट सीरियल के माध्यम से जानने को मिलती हैं| कुछ पात्र हैं- महादेव की ही ऊर्जा से उत्पन्न – जलंधर और अंधक, जलंधर तो त्रिलोकाधिपति भी बन जाते हैं, इनके अलावा बाणासुर जो महादेव के आशीष से ही महाबली बनता है और फिर सबके लिए खतरा बन जाता है|

ऐसा लगता है कि असुर लोग पहले शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए ही तपस्या करते हैं और फिर उन देवों के लिए भी खतरा बन जाते हैं, जिनसे वे वरदान प्राप्त कराते हैं| कुछ ऋषी तो ऐसा लगता है कि हमेशा श्राप देने के लिए ही तैयार रहते हैं, लेकिन कहा जाता है कि उनके श्राप भी दुनिया के कल्याण के लिए ही होते हैं|
तुलसीदास जी ने महादेव और माता पार्वती के बारे में लिखा है-

भवानी शंकरौ वंदे, श्रद्धा विश्वास रूपिणौ

वास्तव में माता भवानी के मन में अपार श्रद्धा है, लेकिन वैसा अडिग विश्वास नहीं है, जैसा महादेव के मन में है, शायद यही कारण है कि वे जब श्रीराम को सीता जी की खोज में वन में भटकते हुए देखते हैं, तब वे सीता माता का वेष बदलकर उनकी परीक्षा लेने चली जाती हैं| श्रीराम उनको तुरंत पहचान कर प्रणाम करते हैं और इसके बाद महादेव उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने से इंकार कर देते हैं, क्योंकि उन्होंने सीता का रूप धरा था, जिनको महादेव अपनी माता का दर्जा देते हैं|

ऐसे अनेक पौराणिक प्रसंग इस सीरियल में आते हैं, जिनको देखना और जानना सभी के लिए अच्छा होगा| जब यह सीरियल प्रसारित हुआ था तब शायद एक वर्ष से अधिक तक प्रसारित हुआ था, हमने इसको लॉक डाउन की अवधि में देखा है और आशा है कि जल्द ही इसे पूरा कर लेंगे|

एक त्रुटि मुझे इस सीरियल में, काल-क्रम की दृष्टि से लगी, शायद सीरियल निर्माताओं तक मेरी बात पहुँच पाए| सीरियल में यह दिखाया कि आदि शक्ति पहले जन्म में सती के रूप में श्रीराम जी की परीक्षा लेती हैं और बाद में पार्वती के रूप में पुनः महादेव से मिलती हैं| लेकिन फिर पार्वती के रूप में उनके अवतार के बाद ही श्रीराम का जन्म दिखाया गया है और वे सीता जी को विवाह के लिए आशीर्वाद भी देती हैं|

इस सीरियल में प्रसंग तो इतने हैं कि उनको लिखते ही जा सकते हैं, लेकिन मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि यह सीरियल देखने लायक है| एक बात और मेरी 6 वर्ष की पोती भी यह सीरियल नियमित रूप से देखती है और कभी-कभी ऐसी भाषा बोलती है- ‘आपकी आज्ञा का पालन करना मेरा दायित्व है’|

आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|

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