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हमको दिवाना तुमको, काली घटा कहेंगे!

हमारी फिल्में हों अथवा कहानी हो, उपन्यास हो, इन सबमें जीवन को ही तो चित्रित किया जाता है| और जीवन में अच्छे-बुरे सभी तरह के अनुभव होते हैं| जैसे दर्द भरे नगमे भी हमारी फिल्मों में बहुत सारे हैं, देशभक्ति के भी हैं, किसी भी भाव के लिए, जो हमारे मन में आ सकता है, उससे जुड़े हुए गीत हमारी फिल्मों में मिल जाएंगे|


आज रोमांस और मस्ती से जुड़ा एक युगल गीत यहाँ शेयर कर रहा हूँ| यह गीत मजरूह सुल्तानपुरी जी ने लिखा है और ‘गंगा की लहरें’ फिल्म के लिए किशोर कुमार जी और लता मंगेशकर जी ने बड़े मस्ती भरे अंदाज़ में गाया है|


लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-



-छेड़ो न मेरी जुल्फें,
सब लोग क्या कहेंगे|

-हमको दिवाना तुमको
काली घटा कहेंगे|

छेड़ो न मेरी जुल्फें||

-आती है शर्म हमको
रोको ये प्यारी बातें|

-जो तुम को जानते हैं,
वो जानते है तुम्हारी बातें|

तुम कह लो शर्म इसको
हम तो अदा कहेंगे|

छेड़ो न मेरी जुल्फें||


-मैं प्यार हूँ तुम्हारा
मेरा सलाम ले लो|


-तुम इस को प्यार समझो
तुम इसको
चाहत का नाम दे लो,
लेकिन ज़माने वाले
इस को खता कहेंगे|

-हम को दिवाना तुमको
काली घटा कहेंगे|

छेड़ो न मेरी जुल्फें||

-तौबा तेरी नज़र के
मस्ती भरे इशारे|


-देखेंगे हमको तुमको
जो मुस्करा के सारे,
उल्फत में दो दिलों को
बहका हुआ कहेंगे|

छेड़ो न मेरी जुल्फें||



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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