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चक्रवर्ती सम्राट अशोक !

आज बात करूंगा सीरियल ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ के बारे में जो वर्ष 2015-16 के दौरान कलर्स चैनल पर दिखाया गया था| इससे पूर्व मैंने ‘देवों के देव महादेव’ देखा था और उसके बारे में एक आलेख लिखा था| ‘देवों के देव महादेव’ सीरियल देखने में हमें लॉक डाउन के प्रारंभ होने से उसके समाप्त होने तक, लगभग 3 माह का समय लग गया था| अब हम वूट्स (voots) पर ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ देख रहे हैं, हम प्रतिदिन कम से कम 4-5 एपिसोड देखते हैं और लगता है कि इस वृहद सीरियल को देखने में भी इतना ही लंबा समय लग जाएगा|


अभी तक हमने लगभग 100 एपिसोड देखे हैं, जिनमें बालक अशोक की भूमिका सिद्धार्थ निगम ने निभाई है, चाणक्य की भूमिका में तो मनोज जोशी हैं ही, समीर धर्माधिकारी ने सम्राट बिन्दुसार की भूमिका निभाई है| अब तक जो देखा है, उससे लगता है कि निश्चित रूप से इस सीरियल को देखकर जहां सम्राट अशोक और मौर्य वंश के इतिहास के बारे में काफी जानकारी मिलेगी और काफी मनोरंजन भी होगा| बालक अशोक के कारनामे भी काफी सराहनीय हैं और चाणक्य, जो राजनीति और अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के रचयिता हैं, उनके बारे में भी इस सीरियल से उपयोगी जानकारी मिलेगी|


इसमें एक चरित्र राजमाता हेलेना भी है, जो सम्राट चन्द्रगुप्त की विदेशी पत्नी थीं, जिसे सम्राट बिन्दुसार वास्तव में माता जैसा ही सम्मान देते हैं, परंतु उस महिला के मन में प्रतिशोध की ज्वाला धधक रही है, क्योंकि उसका बेटा जस्टिन राजा नहीं बन पाया था| चाणक्य तो जैसा हम सभी जानते हैं मौर्य वंश की प्रतिष्ठा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं और जैसा कि अक्सर राज परिवारों के बारे में सुना ही जाता राज भवनों की एक प्रमुख विशेषता होती है- अनेक रानियाँ और निरंतर चलते षडयंत्र!

ऐसे में विदेशी राजमाता- हेलेना की भूमिका में सुजाने बेर्नेट ने भी अपनी खलनायिका वाली भूमिका बड़ी कुशलता से निभाई है, अब इसका मैं क्या करूं कि उनके अभिनय, भाषा और पुत्र मोह को देखकर बरबस श्रीमती सोनिया गांधी की याद आ जाती है| जहां तक हमने देखा है उसमें समूचे मौर्य वंश को राजकुमार जस्टिन के विवाह के लिए बने विशेष ‘लाक्षागृह’ में भस्म करके गुप्त सुरंग से निकाल जाने की हेलेना और उसके साथियों की योजना फेल हो जाती है, हाँ कुछ लोगों की मृत्यु अवश्य होती है, और इस षडयंत्र का दोष राजकुमार जस्टिन, अपनी माँ को बचाने के लिए अपने सिर ले लेते हैं|

अशोक की माँ और बिन्दुसार की चौथी पत्नी- धर्मा, अभी तक राजमहल में सेविका बनकर ही रह रही है और सीरियल में अक्सर यह पता नहीं चलता कि कब किसका, किसके साथ प्रेम चल रहा है और किसके साथ शत्रुता! ऐसा भी लगता है कि यदि आज की तरह वीडियो कैमरे प्रमुख स्थानों पर लगे होते और मोबाइल फोन भी होते तो बहुत सारे षडयंत्र नहीं हो पाते|


खैर ये सीरियल पूरा देख पाने में तो काफी समय लग जाएगा, यही मन में आया कि अभी तक के इस अनुभव को शेयर करते हुए यह बताऊं कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरियल को देखने का अनुभव काफी अच्छा और उपयोगी होगा, यदि आपके पास इतना धैर्य, रुचि और समय है| आगे चलकर इस सीरियल में सम्राट अशोक की भूमिका भी मोहित रैना निभाएंगे, जिन्होंने ‘देवों के देव महादेव’ में महादेव की भूमिका निभाई थी|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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10 replies on “चक्रवर्ती सम्राट अशोक !”

अच्छी जानकारी दी है आपने और आपका आकलन भी बिल्कुल उचित है। मैं केवल अपनी ओर से कुछ ऐसी बातें रखना चाहता हूं जो लोग आम तौर पर अशोक के बारे में नहीं जानते और जो इस सीरिअल में कदापि नहीं दिखाया जाएगा।
अशोक अत्यंत क्रूर व्यक्ति था। उसने अपने कितने ही रिश्तेदारों को राज गद्दी के लिय मरवाया था। अशोक केवल अपने मन की सुनता था। और जहां तक रही बात बौद्ध धर्म अपनाने की, तो वो अशोक ने कलिंग की लड़ाई से पहले ही अपना ली थी। कारण कि उस समय बौद्ध धर्म प्रधान में था और अशोक बौद्धों का समर्थन चाहते थे। तो ये सारी बातें की अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया कलिंग युद्ध के बाद, ये कोरी बकवास है। खुद अशोक ने कई राज्यों को कलिंग की तरह के अंजाम की धमकी दी थी। एक किस्सा और है अशोक का। वो कुछ ऐसा है कि एक बार एक जैन ने एक चित्र बनाई जिसमें बुद्ध को जैन तीर्थंकर के आगे झुकते हुए दिखाया गया था। उसे देख कर अशोक इतना भड़क गए कि उसने उस व्यक्ति को उसके परिवार सहित उसके घर में ही जला देने का आदेश दिया। और इस आदेश का यथोचित पालन भी हुआ। इतना ही नहीं, अशोक ने ये घोषणा कर दी कि प्रत्येक जैन का सर लाने पर उसे पैसे दिए जाएंगे। इससे राज्य में जैनों के जान पर बन आई और प्रत्येक दिन कई जैनों के सर काटकर लाए जाने लगे। एक दिन अशोक के ही एक रिश्तेदार का सर किसी ने ले आया और तब जाकर अशोक ने उस आदेश को बंद करवाया।
जहां तक कौटिल्य के प्रशासन व्यवस्था की बात थी, अशोक ने उसका भी सत्यानाश कर दिया था और लोगों की अर्थिक, सामाजिक स्वतन्त्रता पे अपनी मर्जी थोपनी शुरू कर दी। इससे मौर्य साम्राज्य की अर्थिक हालत बिगड़ती गई और साम्राज्य अंदर से कमजोर होता गया। आसान शब्दों में अशोक ने free market Mauryan society को एक socialist state बनाया दिया और socialist की तरह अनेकानेक तरीकों से अपने प्रजा के अधिकारों पर अंकुश लगाते रहा और अपने विरोधियों को चाहे वो कोई तुच्छ नागरिक को, मृत्यु दंड देता रहा। इसी कारण अशोक काल में ही मौर्य साम्राज्य का पतन शुरू हो गया और अशोक की मृत्यु के कुछ ही दशकों के भीतर मौर्य साम्राज्य का अंत हो गया।
मेरी कई बातें अशोक वादना से ली गई हैं जिसमें अशोक का बखान भी किया गया है परंतु उसकी आलोचना भी की गई है। भारतीय कभी भी अशोक को पसंद नहीं करते थे इसीलिए उसे भुला दिया था और कोई भी बड़ा राजा अपना नाम अशोक नहीं रखता था। हाँ, चन्द्रगुप्त नाम के कई राजा हुए।

Dhanyavad ji, meri itihas sambandhit jaankaari bahut seemit hai aur maine kewal ye serial jitna abhi tak dekha uske baare me hi baat ki hai.

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