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शुभाशीष- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Benediction’ का भावानुवाद-


गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता



शुभाशीष



इस लघु प्राणी को आशीष दो, इस शुभ्र आत्मा को। जिसने जीता है स्वर्ग का चुंबन,
हमारी धरती के लिए|
उसे सूर्य के प्रकाश से प्रेम है, उसे अपनी माता की सूरत प्यारी
लगती है|
उसने न तो धूल को धिक्कारना सीखा है, और न स्वर्ण के पीछे
भागना|


उसे अपने हृदय से लगा लो और आशीष दो|
वह सैंकड़ों चौराहों वाले इस क्षेत्र में आया है|
मुझे नहीं मालूम कि भीड़ में उसने तुम्हें कैसे चुना, तुम्हारे द्वार पर आया,
और तुम्हारा हाथ थामा, अपना मार्ग जानने के लिए|


वो तुम्हारे पीछे चलेगा, हँसता और बतियाता, और उसके हृदय में कोई
संदेह नहीं होगा|
उसका विश्वास कायम रखो, उसको सीधा मार्ग बताओ और आशीष दो|


उसके सिर पर अपना हाथ रखो, और यह प्रार्थना करो कि यद्यपि नीचे
लहरें कठिन चुनौती दे रही हैं, परंतु ऊपर से हवा आ जाए, उसकी नौका की पाल को भर दे,
और उसको दिशा देते हुए, शांति के स्वर्ग में ले जाए|


जल्दबाजी में उसे भूल न जाना, उसे अपने हृदय से लगाना और
उसे आशीष देना|


-रवींद्रनाथ ठाकुर



और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार पर मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-




Benediction



Bless this little heart, this white soul that has won the kiss of
heaven for our earth.
He loves the light of the sun, he loves the sight of his
mother’s face.
He has not learned to despise the dust, and to hanker after
gold.
Clasp him to your heart and bless him.
He has come into this land of an hundred cross-roads.
I know not how he chose you from the crowd, came to your door,
and grasped you hand to ask his way.
He will follow you, laughing the talking, and not a doubt in
his heart.
Keep his trust, lead him straight and bless him.
Lay your hand on his head, and pray that though the waves
underneath grow threatening, yet the breath from above may come and
fill his sails and waft him to the heaven of peace.
Forget him not in your hurry, let him come to your heart and
bless him.



-Rabindranath Tagore



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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9 replies on “शुभाशीष- रवीन्द्रनाथ ठाकुर”

Sir,great its very rare to see the people talking or writing in hindi ..Many felt ashamed of doing so,I greatly got inspired from you sir that you are keeping our language as priority and just keeping your blogs in Indian Origin too…I got influenced by you sir ..keeep writing and preserving our culture.. 🙂

yes Sir.. keep writing ,it’s a privilage for us to go through our Indian culture and read any content in hindi..It gives a patriotic feeling .And preserve love and respect for our country..

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