ये हुआ पेपर लीक!

आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है –

दिल्ली में सीबीएसई के कुछ पेपर लीक होने की घटना बहुत खेदजनक है और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान व्यवस्था के रहते इसमें सुधार की संभावना नजर नहीं आ रही है।


आइए विचार करें कि इस प्रकार की घटनाएं आखिर क्यों बढ़ रही हैं। युवाओं के आतंकवादी बनने, गुंडों के गैंग में शामिल होने, एटीएम से फ्रॉड करके पैसा निकालने या अगर यह कुशलता हासिल न हो एटीएम मशीन को ही उठा ले जाने की दुस्साहसिक घटनाओं को भी मैं इस एक ही प्रवृत्ति के अंतर्गत देखता हूँ।


कुल मिलाकर देखा जाए तो ऐसी व्यवस्था है कि लोग शिक्षा प्राप्त करें, कोई कुशलता विकसित करें और उसके बाद किसी समुचित नौकरी के लिए लाइन में लगें क्योंकि ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो अपने लिए स्वयं कोई रोज़गार सृजित कर सकें।


यह प्रक्रिया बहुत धीमी लगती है और आज के समय में ऐसे युवा भी बड़ी संख्या में मिल जाते हैं जो संपन्नता के पालने में पल रहे हैं और हर जगह अपनी इस संपन्नता का प्रदर्शन करते हैं। वे रेस्तरां हों, क्लब हों, पब हों या कोई अन्य स्थान हो जहाँ ऐसे लोगों के संपर्क में वे लोग भी आते हैं जो जीवन के धीमी गति वाले ट्रैक पर चल रहे हैं।


ऐसी स्थिति में बहुत से लोग हैं जिनको कोई भरमा लेता है या स्वयं ही उनके दिमाग में ऐसा कोई शैतानी आइडिया आ जाता है। आज के समय में यह भी सच्चाई है कि विश्व गुरू भारत, संस्कारों के मामले में कहीं नहीं ठहरता है। आज हमारा देश बुराइयों में दुनिया का नेतृत्व करने की हालत में है।


ऐसे लोग हर जगह मिल जाएंगे जो आसानी से बड़ी कमाई करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे में वे चाहे आतंकवादी बनें, गुंडा बने या किसी भी प्रकार का फ्रॉड करें।


ऐसे मामलों को बढ़ावा देने में हमारी सुस्त और नाकारा न्याय व्यवस्था का भी बहुत बड़ा हाथ है। अगर ऐसा काम करके पकड़े जाने पर शीघ्र और कठोरतम दंड मिले तो उससे बहुत से संभावित अपराधियों का हौसला पस्त हो सकता है। लेकिन लगता यही है कि कुछ भी करके इस देश में आप बच सकते हैं।


ऐसे में साहिर लुधियानवी जी की ये पंक्तियां याद आती हैं , जो फिल्म- ‘फिर सुबह होगी’ के लिए मुकेश जी ने गाई हैं और राज कपूर जी पर फिल्माई गई हैं –
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम
आज कल वो इस तरफ देखता है कम ..
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम|


आजकल किसी को वो टोकता नहीं
चाहे कुछ भी कीजिये रोकता नहीं
हो रही है लूटमार घट रहें हैं गम|
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम||


किसको भेजे वो यहाँ खाक छानने
इस तमाम भीड़ का हाल जानने
आदमी हैं अनगिनत देवता हैं कम|
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम||


जो भी कुछ है ठीक है ज़िक्र क्यों करे
हम ही सब जहान की फ़िक्र क्यों करें
जब तुम्हे ही गम नहीं तो क्यों हमें हो गम|
आसमां पे है खुदा और जमीं पे हम|
|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार।

******

3 thoughts on “ये हुआ पेपर लीक!”

  1. I was very fascinated and felt very proud when I began listening songwriters like him, Majruh Sultanpuri, Anand Bakshi, Kaifi Azmi and especially Gulzar. It was the best era for music that is not coming back. Great post. Thank you sir!

    Reply

Leave a Reply

%d bloggers like this: