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पेंशन की टेंशन -2

मैं सामान्यतः अपने ब्लॉग का प्रयोग इस तरह की पोस्ट लिखने के लिए नहीं करता, लेकिन शायद पहले भी मैंने एक बार ऐसा आलेख लिखा है, आज फिर से इस विषय पर लिख रहा हूँ|


हाँ तो ये पोस्ट है पेंशन के बारे में! मैं बता दूँ कि मैं एक सार्वजनिक उद्यम में काम करता था और रायबरेली, उत्तर प्रदेश से 1 मई 2010 को रिटायर हुआ| मेरा एकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, ऊंचाहार, रायबरेली में था, जिसमें अब तक मेरी सरकारी पेंशन, ईपीएस-95 के अंतर्गत, ऊंट के मुंह में जीरे जैसी, लगभग 1200 रु आती है| मैं ये भी बता दूँ कि रिटायरमेंट के बाद मैं 5-6 साल गुड़गांव में रहा, और अब पिछले 3-4 साल से पणजी, गोवा में रहता हूँ|


ये पेंशन आती है- भविष्य निधि कार्यालय, लखनऊ से| पहले मैं और लोगों की तरह प्रतिवर्ष ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ स्टेट बैंक के माध्यम से भेजता था और उसको भी कम से कम एक बार तो लखनऊ का यह पेंशन कार्यालय नकार ही देता था|


हमारे प्रधान मंत्री जी ने पेंशन धारकों के इस दर्द को समझा और यह व्यवस्था की, कि हम अपने मोबाइल में उमंग एप्लिकेशन डाउनलोड करके उसके माध्यम से लाइफ सर्टिफिकेट भेज सकते हैं| माननीय प्रधानमंत्री जी की सोच बहुत अच्छी है लेकिन ये जो सिस्टम है ना, ये बड़ा जालिम है| मैं बहुत लंबी कहानी नहीं सुनाऊँगा, बस इतना ही बताऊंगा कि इस ‘ऐप’ के माध्यम से मैंने इस वर्ष 3 बार ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ भेजा| (इत्तफाक से मुझे, लॉक डाउन के दौरान, 6-7 महीने बंगलौर में भी रहना पड़ा), तीसरी बार जब मैं ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ भेज रहा था तब सिस्टम द्वारा पूछा गया कि मैं ‘इस सेवा से संतुष्ट हूँ, या नहीं’! इसके उत्तर मैं मैंने लिखा कि ‘तीसरी बार यह सर्टिफिकेट भेज रहा हूँ, अगर सफल हो गया तब मानूँगा’|


इसके बाद अभी संदेश मिला कि ‘लाइफ सर्टिफिकेट’ न भेजने के कारण पेंशन बंद हो गई है| आप अपना लाइफ सर्टिफिकेट भेजिए| इसके बाद अभी भेजने की कोशिश की तो संदेश आया कि ‘बायोमैट्रिक सर्टिफिकेशन’ के साथ इसको भेजा जाए| मुझे नहीं मालूम कि कितने पेंशन धारकों के पास ऐसे मोबाइल सेट होंगे, जिनमें ‘बायोमैट्रिक सर्टिफिकेशन’ की व्यवस्था होगी| वैसे एक व्यवस्था जिसका लाभ मैंने पहले उठाया है, वह है कि स्थानीय ‘भविष्य निधि कार्यालय’ सर्विस सेंटर के रूप में काम करते हैं, अतः मैं वहाँ ही चला जाता हूँ| फिर मैं पणजी, गोवा के भविष्य निधि कार्यालय गया, तो मुझे बताया गया कि ‘बायोमैट्रिक’ वाला काम कोरोना के कारण बंद है, हाँ उन्होंने मुफ्त में मुझे बहुत सी सलाह दे डालीं, क्योंकि इस मामले में तो हमारे लोग एक्सपर्ट हैं|


यह भी बता दूँ कि मैंने इस बीच यह भी प्रयास किया था कि बैंक का अपना एकाउंट ट्रांसफर करा लूँ, और उसके बाद पेंशन भी ट्रांसफर करा लूँगा| गुड़गांव में रहते हुए इसके लिए वहाँ की ब्रांच के माध्यम से आवेदन भेजा था, परंतु पता ही नहीं चला कि वो आवेदन कहाँ गया|


दिक्कत यही है न कि पेंशन कार्यालय भी सरकारी है और बैंक भी सरकारी| फिर काम में गति आएगी तो कैसे|


अब हर बात प्रधान मंत्री जी तक ही तो पहुंचनी जरूरी नहीं है, संभव है कि इस सिस्टम में ही कुछ उच्च अधिकारी ऐसे हों, जो इस सिस्टम को प्रभावी बनाने में रुचि रखते हों, तो संभव है कुछ बेहतर हो जाए और लाखों पेंशन धारकों को सुविधा हो जाए| रही बात पेंशन की राशि को किसी हद तक सम्मान जनक बनाए जाए की, तो वह तो होना ही चाहिए|


बस यही सोचकर लिख रहा हूँ, क्योंकि आवाज उठाते रहना चाहिए, क्या मालूम कब वह सही कानों तक पहुँच जाए|


आज के लिए इतना ही|
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17 replies on “पेंशन की टेंशन -2”

I was pained to read your plight. The intent of government may be noble but its implementation is very poor. Hope you will succeed in your endeavour. And thanks from the bottom of my heart for all the love and support for my blogs

Thanks Nalini ji, That option I know, I was not discussing my personal problem actually but the flaws in the system and the callous attitude of the officials.

This is very bad on part govt..indeed to the retired people they should pay more attention and the ammount i am so surprised its drastically low….

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