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सुदूर काल – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘Distant Time’ का भावानुवाद-


गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता



सुदूर काल


मुझे नहीं मालूम कि किस सुदूर काल से
तुम आ रहे हो पास, मुझसे मिलने के लिए|
तुम्हारा सूरज और सितारे, कभी तुमको हमेशा के लिए मेरी दृष्टि से छिपा नहीं पाएंगे|

बहुत सी सुबहों को और शामों को, तुम्हारे कदमों की आहट सुनी गई है
तुम्हारा संदेशवाहक मेरे हृदय में पहुंचा है तथा मुझसे गुप्त मंत्रणा की है|


पता नहीं क्यों आज मेरा जीवन अतिरिक्त रूप से गतिशील है,
और मेरा हृदय आनंद से कंपायमान हो रहा है|

क्या मेरे लिए यहाँ अपना काम समेटने का समय आ गया है,
और मैं वायुमंडल में तुम्हारी मधुर उपस्थिति की सुगंध महसूस कर रहा हूँ|



-रवींद्रनाथ ठाकुर



और अब वह अंग्रेजी कविता, जिसके आधार पर मैं भावानुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ-





Distant Time




I know not from what distant time
thou art ever coming nearer to meet me.
Thy sun and stars can never keep thee hidden from me for aye.

In many a morning and eve thy footsteps have been heard
and thy messenger has come within my heart and called me in secret.

I know not only why today my life is all astir,
and a feeling of tremulous joy is passing through my heart.


It is as if the time were come to wind up my work,
and I feel in the air a faint smell of thy sweet presence.




-Rabindranath Tagore



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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4 replies on “सुदूर काल – रवींद्रनाथ ठाकुर”

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