Categories
Uncategorized

पेट वक्ष से बड़ा, पेट से बड़ी कमर है!

आज मुझे यहाँ क्या शेयर करना है, यह तो पहले से ही घोषित है| हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध हास्य कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी की एक कविता को मैंने कल शेयर करना प्रारंभ किया था| जी हाँ नेताजी के हास्य-व्यंग्यमय नख-शिख वर्णन में कुछ अंगों के बारे में कल बात कर ली थी, कुछ अंगों का वर्णन बाकी था|


लीजिए आज प्रस्तुत है नेताजी का नख-शिख वर्णन करने वाली उनकी कविता का यह दूसरा भाग –

गर्दन

मटके जैसी गरदन पर ढक्कन-सी ठोड़ी
कितनी बार झुकी यह गरदन यह मत पूछो
अनगिन बार उठी है फोटो खिंचवाने को
अनगिन मालाओं का भारी बोझ पड़ा है बेचारी पर|

वक्षस्थल

वक्षस्थल चट्टान उठाए पत्थर-सा दिल
त्रिवली-तिकड़म पंथ
पेट की पगडंडी पर
गुप्त पंथ काले धन का
तस्कर चोरों का
इसी पंथ से लुकते-छिपते धीरे-धीरे
नाभि कुंड में समा गई सभ्यता देश की
जिसको पाकर कटि-प्रदेश फैला थैली-सा!

पेट

पेट वक्ष से बड़ा, पेट से बड़ी कमर है
ज्यों-ज्यों बढ़ती है महंगाई
त्यों-त्यों कटि बढ़ती जाती है
सुरसा-हनुमान में होड़ लगी हो जैसे
गोल मेज-सी कमर पर मत पेटी-सा पेट
बहुमत खाकर बहुत सा, गए पलंग पर लेट!

कंधे

कंधों पर गरदन है या गरदन पर कंधे
इन कंधों को देख सांड भी शर्माते हैं
इतना ढोया भार देश का इन कंधों ने
अब ये स्वयं देश को ही भारी पड़ते हैं

हाथ


अजगर जैसी लम्बी बांहेंचांदी की खुरपी जैसे नाखून
अंगुलियां हैं कटार-सी
फिर भी इनके ये कर-कमल कहे जाते हैं|
इन हाथों से हाथ मिलाना खेल नहीं है
इन हाथों के हस्ताक्षर के सारे अक्षर स्वर्णाक्षर हैं
क्या न किया इन हाथों ने भारत की ख़ातिर
उद्घाटन करते-करते घिस गईं लकीरें
पूरी उम्र न जितनी जेबें काटीं किसी जेबकतरे ने
एक वर्ष में उतने फीते काटे इन कोमल हाथों ने
अवतारों के हाथ हुआ करते घुटनों तक
इनके पिंडली तक लटके हैं|

पिंडली-पांव

विरोधियों के पिंड-दान-सी चुस्त पिंडली
गड़े हुए धन जैसे टखने
नीचे दो सोने की ईंटें
जिन पर जड़े हुए दस मोती
स्वर्ण-चरण को चाट रहे चांदी के चमचे
आचरणों को कौन देखता
चरण बहुत अच्छे हैं
भारत-माता की छाती पर घाव सरीखे दिखते हैं जो
हैं सब चिन्ह इन्हीं चरणों के!

चाल (चलन)

चाल चुनावों से पहले चीते-सी लम्बी
मंत्रीमंडल में आने के लिए
सांप-सी टेढ़ी-मेढ़ी
मंत्री पद पा जाने पर
मदमस्त हाथी-सी धीमी-धीमी
गिरगिट जैसा रंग देह का बगुले जैसा वेश
देश ध्यान में ये डूबे हैं, इनमें डूबा देश!



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


*********

4 replies on “पेट वक्ष से बड़ा, पेट से बड़ी कमर है!”

Leave a Reply