Categories
Uncategorized

सौ बातों की एक बात है !

लीजिए आज फिर से मैं कभी काव्य-मंचों के अत्यंत लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने बड़ी भावुकता के साथ यह चित्रण किया है, कि किस प्रकार हमको जीवन के सभी रंगों, सभी प्रकार की परिस्थितियों, कभी साथ और कभी अकेलेपन का सामना करना पड़ता है|

लीजिए आज प्रस्तुत कर रहा हूँ स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का यह गीत-



सौ बातों की एक बात है ।

रोज़ सवेरे रवि आता है।
दुनिया को दिन दे जाता है,
लेकिन जब तम इसे निगलता,
होती जग में किसे विकलता|
सुख के साथी तो अनगिन हैं,
लेकिन दुःख के बहुत कठिन हैं|

सौ बातो की एक बात है |


अनगिन फूल नित्य खिलते हैं,
हम इनसे हँस-हँस मिलते हैं|
लेकिन जब ये मुरझाते हैं,
तब हम इन तक कब जाते हैं|
जब तक हममे साँस रहेगी,
तब तक दुनिया पास रहेगी|

सौ बातों की एक बात है |


सुन्दरता पर सब मरते हैं,
किन्तु असुंदर से डरते हैं|
जग इन दोनों का उत्तर है,
जीवन इस सबके ऊपर है|
सबके जीवन में क्रंदन है,
लेकिन अपना-अपना मन है|

सौ बातों की एक बात है ।



आज के लिए इतना ही
नमस्कार|
******

9 replies on “सौ बातों की एक बात है !”

Leave a Reply