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अभागों की टोली अगर गा उठेगी!

स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बातचीत के लहजे में कविता कहने के लिए प्रसिद्ध थे| उन्होंने अनेक बहुमूल्य काव्य संकलन हमें दिए हैं, जिनमें ‘बुनी हुई रस्सी’, ‘गीत फ़रोश’, ‘खुशबू के शिलालेख’, ‘त्रिकाल संध्या’ आदि शामिल हैं और उनके संकलन- ‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए उनको साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्रदान किया गया था|

लीजिए प्रस्तुत है भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता-

चलो गीत गाओ, चलो गीत गाओ।
कि गा – गा के दुनिया को सर पर उठाओ।

अभागों की टोली अगर गा उठेगी
तो दुनिया पे दहशत बड़ी छा उठेगी
सुरा-बेसुरा कुछ न सोचेंगे गाओ
कि जैसा भी सुर पास में है चढ़ाओ।


अगर गा न पाए तो हल्ला करेंगे
इस हल्ले में मौत आ गई तो मरेंगे
कई बार मरने से जीना बुरा है
कि गुस्से को हर बार पीना बुरा है

बुरी ज़िन्दगी को न अपनी बचाओ
कि इज़्ज़त के पैरों पे इसको चढ़ाओ।


आज के लिए इतना ही
नमस्कार|
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