चाँद रोया साथ मेरे, रात रोयी बार -बार!

काफी दिन से मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया कोई गीत शेयर नहीं किया है| लीजिए आज मैं ये शानदार गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्म- ‘एक रात’ के लिए यह गीत ‘अंजान’ जी ने लिखा है और उषा खन्ना जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|

कविता में उद्दीपन का भी महत्व होता है, बहुत से गीतों में हम सुनते हैं कि नायक अथवा नायिका के मनोभावों को प्रकट करने में प्रकृति, हवा, बादल आदि-आदि भी साथ देते हैं| कुछ ऐसा ही इस गीत में भी है|


लीजिए प्रस्तुत है यह अमर गीत-

आज तुमसे दूर हो कर, ऐसे रोया मेरा प्यार,
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोयी बार बार|

कुछ तुम्हारे बंदिशें हैं, कुछ हैं मेरे दायरे,
जब मुक़द्दर ही बने दुश्मन तो कोई क्या करे,
हाय कोई क्या करे,
इस मुकद्दर पर किसी का, क्या है आखिर इख्तियार|
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोयी बार बार …


हर तमन्ना से ज़ुदा मैं, हर खुशी से दूर हूँ,
जी रहा हूँ, क्योंकि जीने के लिये मजबूर हूँ,
हाय मैं मजबूर हूँ|
मुझको मरने भी न देगा, ये तुम्हारा इन्तज़ार|
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोयी बार बार ..



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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