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मासूमियत के नए प्रतिमान!

मेरे घर में आजकल काक्रोच की समस्या काफी गंभीर है| कुछ समझ में नहीं आ रहा कि इनसे कैसे छुटकारा पाया जाए| कई बार जब हम इनको मारने के लिए स्प्रे करने लगते हैं तो पाते हैं कि बहुत छोटे-छोटे मासूम से काक्रोच सामने आते हैं। जो भी हो छोटा बच्चा अच्छा लगता है, इन पर प्यार करें तो क्या हम स्वयं से प्यार कर पाएंगे!


मेरे देश में भी आज कुछ ऐसी ही हालत है| काक्रोच हर कोने से प्रकट हो रहे हैं, किसान आंदोलन के बहाने से! वैसे यह आंदोलन अपने आप में बस गरीब किसान के नाम पर ही है| इस आंदोलन को लेकर ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में पूरे पेज का एक विज्ञापन छापा गया, जिसकी लागत लगभग एक लाख, पचास हजार डॉलर अर्थात एक करोड़ रुपए आती है| किस गरीब किसान संगठन ने खर्च की होगी ये रकम और क्यों!


सिर्फ इतना ही नहीं अमरीका में विज्ञापन के रूप में इस विषय में बनाई गई फिल्म भी करोड़ों में बनाकर दिखाई जा रही है| इसके अलावा ‘ग्रेटा थंबर्ग’ जैसे बिकाऊ ‘पर्यावरण विदों’ ने भी करोड़ों रुपये इसमें कूदने के लिए खाए हैं|

लेकिन जिस ‘टूलकिट’ का इस्तेमाल ‘ग्रेटा’ ने इस संबंध में प्रचार के लिए किया है, और यह बाकायदा ‘कार्य योजना’ है इस विषय को लेकर असंतोष भड़काने और दंगे फैलाने की, वह ‘टूलकिट’ भी हमारे यहाँ की एक मासूम सी बच्ची ने बनाई थी, जो ‘ग्रेटा’ के साथ अपनी चैट में यह स्वीकार करती है कि इसके कारण उस पर यूएपीए के अंतर्गत देशद्रोह संबंधी कार्रवाई हो सकती है|


हम अक्सर अपने देशभक्त नायकों के बारे में बात करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारे यहाँ देशद्रोही भी कम नहीं हुए हैं| मासूम बच्ची ‘दिशा रवि’ की छोटी उम्र का बहाना लेकर भी बहुत से मानवीयता वादी सामने आ गए हैं| वैसे आप यह देख सकते हैं कि ये विशेष लोग कभी देश के पक्ष में खड़े नहीं होते| किसान आंदोलन से जोड़कर जो देश-विरोधी काम किए गए, विशेष रूप से 26 जनवरी को, और जिनकी पूर्व योजना ‘टूलकिट’ आदि में दर्शाई गई, वह इन बेचारों को दिखाई ही नहीं देती|


देश और विदेश में फैला यह वर्ग, जिसमें खालिस्तानी भी सम्मान सहित शामिल हैं, आज के भारत का, और विशेष रूप से देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी का दुश्मन है और उनका मुक़ाबला करने के लिए ये लोग नैतिकता की परवाह न करते हुए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं|

वरना किसान आंदोलन में कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान न किया जा सके| परंतु ये लोग समाधान चाहते ही नहीं हैं| ये लोग तो इस आंदोलन को चुनावों से जोड़कर चलाना चाहते हैं|


देश से प्रेम करने वाले लोग यह विश्वास रखें कि यह लोग इस देश का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे, भले इनके विदेशी साथी कितना ही पैसा इस समस्या को बढ़ाने के लिए बहाते रहें|


आज के लिए इतना ही|
नमस्कार|
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