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मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा!

आज एक बार फिर मैं भारतीय उपमहाद्वीप में शायरी के क्षेत्र की एक  महान शख्सियत रहे ज़नाब अहमद फ़राज़ साहब की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| फराज़ साहब भारत में बहुत लोकप्रिय रहे हैं और अनेक प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने उनके गीत-ग़ज़लों आदि को गाया है|

लीजिए प्रस्तुत है ये खूबसूरत ग़ज़ल-

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा|

इतना मानूस न हो ख़िल्वत-ए-ग़म से अपनी
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा|

तुम सर-ए-राह-ए-वफ़ा देखते रह जाओगे
और वो बाम-ए-रफ़ाक़त से उतर जाएगा|

किसी ख़ंज़र किसी तलवार को तक़्लीफ़ न दो
मरने वाला तो फ़क़त बात से मर जाएगा|

ज़िन्दगी तेरी अता है तो ये जानेवाला
तेरी बख़्शीश तेरी दहलीज़ पे धर जाएगा|

डूबते-डूबते कश्ती को उछाला दे दूँ
मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा|

ज़ब्त लाज़िम है मगर दुख है क़यामत का “फ़राज़”
ज़ालिम अब के भी न रोयेगा तो मर जाएगा|

आज के लिए इतना ही

नमस्कार|   

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