ये कहानी फिर सही!

कविताओं और शायरी के मामले में, मूल परंपरा तो यही रही है कि हम रचनाओं को उनके रचयिता याने कवि अथवा शायर के नाम से जानते रहे हैं| लेकिन यह भी सच्चाई है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ सामान्य जनता तक तभी पहुँच पाती हैं जब उन्हें कोई अच्छा गायक, अच्छे संगीत के साथ गाता है| इसके लिए हमें उन विख्यात गायकों का आभारी होना चाहिए जिनके कारण बहुत सी बार गुमनाम शायर भी प्रकाश में आ पाते हैं|


आज मैं गुलाम अली साहब की गाई एक प्रसिद्ध गजल शेयर कर रहा हूँ, जिसे जनाब मसरूर अनवर साहब ने लिखा है|


लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल, मुझे विश्वास है कि आपने इसे अवश्य सुना होगा-


हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके ग़म ने…

दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके ग़म ने…

नफरतों के तीर खाकर, दोस्तों के शहर में
हमने किस किस को पुकारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके ग़म ने…

क्या बताएँ प्यार की बाजी, वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा, ये कहानी फिर सही
हमको किसके ग़म ने..


आज के लिए इतना ही
नमस्कार|
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