जो अपराधी नहीं होंगे, मारे जाएँगे!

आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री राजेश जोशी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, रचना अपनी बात स्वयं कहती है, इसलिए मैं अलग से कुछ नहीं कहूँगा, कुल मिलाकर यह विपरीत स्थितियों का सामना स्वाभिमान और खुद्दारी के साथ करने का संदेश देने वाली रचना है|


लीजिए आज प्रस्तुत है, श्री राजेश जोशी जी की यह रचना –

जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएँगे

कठघरे में खड़े कर दिये जाएँगे,
जो विरोध में बोलेंगे
जो सच-सच बोलेंगे, मारे जाएँगे|

बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा कि किसी की कमीज हो
उनकी कमीज से ज्‍यादा सफ़ेद,
कमीज पर जिनके दाग नहीं होंगे, मारे जाएँगे

धकेल दिये जाएंगे कला की दुनिया से बाहर,
जो चारण नहीं होंगे
जो गुण नहीं गाएंगे, मारे जाएँगे|


धर्म की ध्‍वजा उठाने जो नहीं जाएँगे जुलूस में,
गोलियां भून डालेंगी उन्हें, काफिर करार दिये जाएँगे|

सबसे बड़ा अपराध है इस समय, निहत्थे और निरपराधी होना,
जो अपराधी नहीं होंगे, मारे जाएँगे|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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