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Film Song

दर्द के नाम से वाक़िफ़ न जहां हो कोई !

आज एक गीत याद आ रहा है, फिल्म- ‘नई रोशनी’ से, यह गीत मोहम्मद रफ़ी साहब ने फिल्म अभिनेता- स्वर्गीय राज कुमार जी के लिए गाया है| राज कुमार जी नशे की एक्टिंग काफी अच्छी करते थे| उनका ‘वक़्त’ फिल्म का एक संवाद बहुत प्रसिद्ध है- ‘जिनके घर शीशे के हों, वो दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकते, मिस्टर शेनोय!” हाँ तो, इस गीत के लेखक थे – राजेन्द्र कृष्ण जी और संगीत दिया था- रवि जी ने|


ये ज़िंदगी भी ऐसी है कि जब तक ठीक से चलती रहे, हम ज्यादा सोचते ही नहीं लेकिन जब पटरी से उतर जाती है, तब इंसान क्या-क्या नहीं सोचता! यही लगता है कि ये सब लोग जीवन को जी कैसे लेते हैं, हम इनकी तरह क्यों नहीं जी पाते! लीजिए यह गीत पढ़िये और उस फिल्म की जो याद आए या इसको सुनकर जो कुछ भी आप महसूस करते हैं, उसको आने दीजिए जी-


किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो,
हम को भी जीने का
अंदाज़ सिखा दो यारो|
किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो|


प्यार लेते हैं कहाँ से
यह ज़माने वाले,
उन गली कूचों का
रस्ता तो दिखा दो यारो|
हम को भी जीने का
अंदाज़ सिखा दो यारो|


दर्द के नाम से
वाक़िफ़ न जहाँ हो कोई,
ऐसी महफ़िल में हमें भी तो
बिठा दो यारो|
हम को भी जीने का अंदाज़
सिखा दो यारो|


साथ देना है तो
खुद पीने की आदत डालो,
वर्ना मैखाने का दर
हम से छुड़ा दो यारो|
हम को भी जीने का अंदाज़
सिखा दो यारो,
किस तरह जीते हैं ये लोग
बता दो यारो|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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