Categories
Film Song

मेरी आत्मा की ये आवाज़ है!

हिन्दी फिल्मों के प्रमुख गीतकार और श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय- पंडित भरत व्यास जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भरत व्यास जी का गीत लेखन का अपना अलग अंदाज़ था और एक बात यह कि उनकी रचनाओं में उनकी अटूट आस्था दिखाई देती है| इत्तफाक से एक बात याद आ रही है कि कांग्रेस नेता श्रीमती गिरिजा व्यास उनकी ही बेटी हैं|

आज के गीत में भी पंडित भारत व्यास जी की अडिग आस्था के दर्शन होते हैं, ईश्वर से वे किस अंदाज़ में बात करते हैं, वह देखने लायक है| लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-


ज़रा सामने तो आओ छलिये
छुप छुप छलने में क्या राज़ है,
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …

हम तुम्हें चाहें तुम नहीं चाहो
ऐसा कभी नहीं हो सकता,
पिता अपने बालक से बिछुड़ से
सुख से कभी नहीं सो सकता|

हमें डरने की जग में क्या बात है
जब हाथ में तिहारे मेरी लाज है,
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …

प्रेम की है ये आग सजन जो
इधर उठे और उधर लगे,
प्यार का है ये क़रार जिया अब

इधर सजे और उधर सजे|
तेरी प्रीत पे बड़ा हमें नाज़ है,
मेरे सर का तू ही सरताज है|
यूँ छुप ना सकेगा परमात्मा,
मेरी आत्मा की ये आवाज़ है|
ज़रा सामने …


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
*******

Leave a Reply