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हम हैं अनाड़ी!

आज 1959 में रिलीज हुई फिल्म -अनाड़ी, का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे शैलेन्द्र जी ने लिखा है और शंकर जयकिशन जी ने इसका संगीत दिया है| इस गीत के लिए गीत लेखन, संगीत और गायन तीनों श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ होने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किए गए थे|

राजकपूर साहब पर फिल्माए गए इस गीत को गाया था मेरे प्रिय गायक – मुकेश जी ने|

कुछ बातों को हम आज के ज़माने में ज्यादा महत्व नहीं देते हैं, उनमें से एक है सादगी, ईमानदारी, सरलता| निदा फाज़ली साहब की एक पंक्ति मुझे बहुत अच्छी लगती है- ‘सोच-समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला‘|

खैर आज आप इस अमर गीत का आनंद लीजिए-

सब कुछ सीखा हमने, ना सीखी होशियारी
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी |

दुनिया ने कितना समझाया, कौन है अपना कौन पराया,
फिर भी दिल की चोट छुपाकर, हमने आपका दिल बहलाया|
खुद ही मर मिटाने की ये ज़िद है हमारी|

सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||

दिल का चमन उजड़ते देखा, प्यार का रंग उतरते देखा,
हमने हर जीने वाले को, धन दौलत पर मरते देखा,
दिल पे मरने वाले, मरेंगे भिखारी|
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||


असली नकली चेहरे देखे, दिल पे सौ सौ पहरे देखे,
मेरे दुखते दिल से पूछो, क्या-क्या ख्वाब सुनहरे देखे,
टूटा जिस तारे पे, नजर थी हमारी|
सच है दुनिया वालों, कि हम हैं अनाड़ी ||

आज के लिए इतना ही|

नमस्कार|

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