अब रात गुजरने वाली है!

आज मैं 1951 में रिलीज़ हुई राजकपूर जी की फिल्म- ‘आवारा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे हसरत जयपुरी जी ने लिखा था और शंकर जयकिशन जी की संगीत जगत की प्रसिद्ध जोड़ी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने अपने मधुर कंठ से यह गीत गाया था|

लीजिए आज प्रस्तुत है यह मधुर गीत-

आ जाओ तड़पते हैं अरमां,
अब रात गुजरनेवाली है
मैं रोऊँ यहाँ, तुम चुप हो वहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|

चाँद की रंगत उड़ने लगी
वो तारों के दिल अब डूब गये, डूब गये
है दर्दभरा बेचैन समा,
अब रात गुजरनेवाली है|


इस चाँद के डोले में आई नज़र
ये रात की दुल्हन चल दी किधर, चल दी किधर
आवाज़ तो दो, खोये हो कहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|

घबरा के नज़र भी हार गई
तकदीर को भी नींद आने लगी, नींद आने लगी
तुम आते नहीं, मैं जाऊँ कहाँ,
अब रात गुजरनेवाली है|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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