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आदमी मुसाफ़िर है !

फिल्मी के अत्यंत प्रसिद्ध और सफल गीतकार स्वर्गीय आनंद बख्शी जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ|

इस गीत में बहुत सरल शब्दों में जीवन दर्शन की कुछ बातें की गई हैं| लीजिए प्रस्तुत है आनंद बख्शी जी का लिखा यह गीत-

आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है,
आते-जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है|

झोंका हवा का पानी का रेला
मेले में रह जाए जो अकेला
वो फिर अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

क्या साथ लाए क्या छोड़ आए
रस्ते में हम क्या छोड़ आए
मंज़िल पे जा के ही याद आता है
आदमी मुसाफ़िर है …

जब डोलती है जीवन की नैया
कोई तो बन जाता है खिवैया
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

रोती है आँख जलता है ये दिल
जब अपने घर के फेंके दिये से
आंगन पराया जगमगाता है
आदमी मुसाफ़िर है …

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 replies on “आदमी मुसाफ़िर है !”

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