ना समझे वो अनाड़ी हैं!

कल राज कपूर जी की ‘आवारा’ फिल्म का एक गीत शेयर किया था, आज उनकी ही फिल्म ‘अनाड़ी’ का एक गीत याद आ रहा है|

कल के गाने में भी राजकपूर थे, उनकी नायिका तो होगी ही, लेकिन आज की फिल्म में नायिका नर्गिस जी नहीं ‘नूतन जी थीं, एक बात और है, इन दोनों गीतों में ही चांद भी है| और हाँ, आज के गीत में लता जी गाती हैं, नायक को ‘अनाड़ी’ बताती हैं, और नायक की तरफ से मुकेश जी बीच-बीच में सिर्फ इसकी हामी भर देते हैं|

राज कपूर जी की इस फिल्म का संगीत भी शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने दिया था और यह गीत भी शैलेन्द्र जी ने ही लिखा था|

लीजिए आज प्रस्तुत है फिल्म- ‘अनाड़ी’ का यह प्यारा सा गीत-


वो चांद खिला, वो तारे हँसे
ये रात अजब मतवाली है,
समझने वाले समझ गए हैं,
ना समझे, ना समझे वो अनाड़ी हैं|
वो चांद खिला–

चांदी सी चमकती राहें,
वो देखो झूम-झूम के बुलाएं|
किरणों ने पसारी बाँहें
कि अरमां, झूम-झूम लहराएं|
बजे दिल के तार, गाये ये बहार
उभरे है प्यार जीवन में|
वो चांद खिला–


किरणों ने चुनरिया तानी
बहारें किसपे हैं आज दीवानी,
चंदा की चाल मस्तानी
है पागल जिसपे रात की रानी|

तारों का जाल, ले ये दिल निकाल
पूछो न हाल मेरे दिल का|
वो चांद खिला–


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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