हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना !

हिन्दी फिल्मों के गायकों के एक तरह से गुरु माने जाने वाले स्वर्गीय कुंदन लाल सहगल जी का गाया एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| एक समय था जब हर नया गायक ऊअनके गाने के ढंग की नकल करता था, यद्यपि आज वैसा कोई नहीं करता और आज वह स्वीकार्य भी नहीं होगा| मुकेश जी के शुरू के गीतों पर भी उनका प्रभाव दिखाई देता है, जैसे ‘दिल जलता है तो जलाने दे, आंसू न बहा, फ़रियाद न कर’|

लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कुंदन लाल सहगल साहब के गाए गीत के बोल, जिनको फिल्म – शाहजाहां के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने लिखा था और नौशाद साहब के संगीत निर्देशन में इसे सहगल साहब ने गाया था| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-


ग़म दिए मुस्तक़िल, इतना नाज़ुक है दिल, ये न जाना
हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना|

दे उठे दाग लो उनसे ऐ महलों कह सुनना
हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना|

दिल के हाथों से दामन छुड़ाकर,
ग़म की नज़रों से नजरें बचाकर
उठ के वो चल दिए, कहते ही रह गए, हम फ़साना,
हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना|

कोई मेरी ये रूदाद देखे, या मोहब्बत के अंदाज़ देखे,
जल रहा है जिगर, पड़ रहा है मगर मुसकुराना,
हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना|


ग़म दिए मुस्तक़िल, इतना नाज़ुक है दिल, ये न जाना
हाय हाय ये ज़ालिम ज़माना|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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