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छोड़ गए बालम!

आज एक बार फिर से मैं राज कपूर साहब की एक फिल्म- बरसात का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे लता मंगेशकर जी और मुकेश जी ने गाया है| यह गीत लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था शंकर जयकिशन की जोड़ी ने| जैसा कि आप गीत के बोल पढ़कर याद कर सकते हैं, यह बहुत ही प्यारा गीत है|

लीजिए प्रस्तुत है यह मधुर गीत-


छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए
तोड़ गए बालम
मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए|

छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया|
टूट गया बालम
मेरा प्यार भरा दिल टूट गया|


फूल संग मुस्काएं कलियाँ
मैं कैसे मुस्काऊँ
बादल देख के भर आई अंखियाँ
छम-छम नीर बहाऊँ
मैं छम-छम नीर बहाऊँ|

छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया,
टूट गया बालम
मेरा प्यार भरा दिल टूट गया|


दिल की लगी को क्या कोई जाने
मैं जानूं दिल जाने,
पलकों की छाया में नाचे
दर्द भरे अफ़साने
हाय दर्द भरे अफ़सा
ने,

छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए|
तोड़ गए बालम
मेरा प्यार भरा दिल तोड़ गए|


पहले मन में आग लगी और
फिर बरसी बरसात,
ऐसी चली बिरहा की आंधी
तड़पत हूँ दिन-रात
मैं तड़पत हूँ दीन-रात|


छूट गया बालम
हाय साथ हमारा छूट गया|
छोड़ गए बालम
मुझे हाय अकेला छोड़ गए|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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