झूठी कहानी पे रोये!

आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ वह ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रची गई एक संभवतः काल्पनिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ‘मुगल-ए-आज़म’ से है, जो अपने आप में ही एक ऐतिहासिक फिल्म थी| उस समय तक शायद ऐसे भव्य सेट्स और ऐसी स्टार-कास्ट वाली और फिल्में नहीं बनी थीं| इस फिल्म में पृथ्वी राज कपूर साहब, दिलीप कुमार जी, मधुबाला जी, दुर्गा खोटे जी और अनेक अन्य कलाकारों ने लाजवाब अभिनय किया था| के. आसिफ साहब की यह फिल्म, हिन्दी फिल्मों के इतिहास में एक मील का पत्थर थी|

लीजिए अब मैं लता मंगेशकर जी के गाये इस मधुर गीत को शेयर कर रहा हूँ, जो प्रेम में मिली भयंकर चोट को बयां करता है| गीत लिखा है- शकील बदायुनी साहब ने और इसका मधुर संगीत दिया है नौशाद अली साहब ने| प्रस्तुत है यह गीत-



मोहब्बत की झूठी
कहानी पे रोये,

बड़ी चोट खाई
जवानी पे रोये
जवानी पे रोये|

मोहब्बत की झूठी
कहानी पे रोये

न सोचा न समझा
न देखा न भाला
तेरी आरज़ू ने हमें मार डाला
तेरे प्यार की मेहरबानी
पे रोये, रोये|


मोहब्बत की झूठी
कहानी पे रोये|

खबर क्या थी होठों
को सीना पड़ेगा,
मोहब्बत छुपा
के भी जीना पड़ेगा,
जिए तो मगर
ज़िंदगानी पे रोये रोये|

मोहब्बत की झूठी
कहानी पे रोये|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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