हम चल रहे थे, वो चल रहे थे!

हमारी फिल्मों में भी कविता/गीतों को महत्वपूर्ण स्थान मिला है| फिल्मों की कहानी को आगे बढ़ाने में गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है| हमारे समय के अनेक प्रसिद्ध रचनाकारों- कवियों और शायरों ने फिल्मों में अपने गीतों/ग़ज़लों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है| फिल्मों एक बात यह भी होती है कि गीत सिचुएशन पर आधारित होते हैं| कहीं प्रेम मे मगन नायक-नायिका, कहीं विरह में तड़पते और भी अनेक रंग होते हैं, जैसे एक रंग आप इस गीत में देखेंगे|

लीजिए आज प्रस्तुत है फिल्म ‘दुनिया ना माने’ के लिए राजिंदर किशन जी का लिखा यह गीत, जिसका संगीत दिया था मदन मोहन जी ने और इस गीत को मुकेश जी ने अपने जादुई स्वर से सजाया है-


हम चल रहे थे, वो चल रहे थे
मगर दुनियावालों के दिल जल रहे थे
हम चल रहे थे—

वही हैं फिज़ायें वही है हवायें
मगर प्यार कि अब नही वो अदायें
बुलायें हम उनको, मगर वो न आयें|
हम चल रहे थे, वो चल रहे थे—

उन्हें भूलकर भी, भुला ना सकूंगा
जो दिल में लगी है बुझा ना सकूंगा
मैं सपनों की दुनिया सजा ना सकूंगा|


हम चल रहे थे, वो चल रहे थे
मगर दुनियावालों के दिल जल रहे थे
हम चल रहे थे—



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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