सजन घर जाना है!

आज फिर से मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| प्रारंभ में मुकेश जी ने दिलीप कुमार जी के लिए अनेक खूबसूरत गीत गए थे, यह गीत भी उनमें से ही एक है| यह गीत है पुरानी फिल्म- मेला का, जिसे लिखा था शकील बदायुनी साहब ने और इसका संगीत दिया था – नौशाद साहब ने|

लीजिए आज प्रस्तुत है मुकेश जी का गया यह कालजयी गीत-



गाए जा गीत मिलन के
तू अपनी लगन के
सजन घर जाना है|

काहे छलके नैनों
की गगरी, काहे बरसे जल
तुम बिन सूनी साजन की
नगरी परदेसिया घर चल,
प्यासे हैं दीप गगन के
तेरे दर्शन के
सजन घर जाना है|


छूट न जाए जीवन का डेरा
मुझको है ये गम
हम-तुम अकेले ये जग लुटेरा
बिछड़ें न मिलके हम
बिगड़ें नसीब न बनके
ये दिन जीवन के
सजन घर जाना है|

गाए जा गीत मिलन के
तू अपनी लगन के
सजन घर जाना है


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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