ओ मेरी शर्मीली!

आज हिन्दी के अत्यंत लोकप्रिय गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी को याद करते हैं उनके एक फिल्मी गीत के माध्यम से| फिल्मों में जैसा आप जानते हैं सिचुएशन के हिसाब से गीत लिखे जाते हैं| यह गीत 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘शर्मीली’ के लिए नीरज जी ने लिखा था और शशि कपूर जी और राखी जी पर फिल्माया गया था| सचिन देव बर्मन जी के संगीत निर्देशन में यह गीत किशोर कुमार जी ने गाया था और लगता है कि यह गीत किशोर दा की मस्त आवाज़ और अंदाज़ के लिए ही बना था|

इस गीत में नीरज जी ने अपने नाम का प्रयोग भी बहुत खूबसूरती से, नायिका को कमल जैसे नैनों वाली (नीरज नयना) बताते हुए किया है| लीजिए प्रस्तुत है यह गीत-


ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
आओ न तरसाओ ना
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

तेरा काजल लेकर रात बनी, रात बनी,
तेरी मेहंदी लेकर दिन उगा दिन उगा
तेरी बोली सुन कर सुर जगे सुर जगे
तेरी खुशबू लेकर
फूल खिला फूल खिला
जान ए मन तू है कहाँ

ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

तेरी राहों से गुज़रे
जब से हम, जब से हम
मुझे मेरी डगर तक
याद नहीं, याद नहीं
तुझे देखा जब से
दिलरुबा दिलरुबा
मुझे मेरा घर तक
याद नहीं, याद नहीं
जान ए मन तू है कहाँ


ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

ओ नीरज नयना
आ ज़रा आ ज़रा
तेरी लाज का घूंघट
खोल दूं खोल दूं
तेरे आंचल पर कोई
गीत लिखूं गीत लिखूं
तेरे होंठों में
अमृत घोल दूं घोल दूं
जान ए मन तू है कहाँ

ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
आओ न तरसाओ ना
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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