हमारा कल भी क्या होगा!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर रहा हूँ| देव कोहली जी का लिखा यह गीत मुकेश जी ने फिल्म- ‘जीवन रेखा’ के लिए गाया था, इसका संगीत तैयार किया था जगदीश राजपुरोहित जी ने|

कभी कभी हमें लगता था कि खुशियां हमारे लिए बनी ही नहीं है, इंसान इंतजार करता रहता है कि अब शायद सही समय आएगा , अब आएगा लेकिन आखिर में हारकर कुछ ऐसा ही कहने लगता है, जैसा इस गीत में कहा गया है| लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह दर्द भरा गीत


अपनी नज़रों से बहुत दूर छुपा दूं खुद को
जी में आता है कि कहीं रख के भुला दू खुद को|

न अपना था जो कल गुज़रा
जो अब है वो है गैरों का,
नहीं उम्मीद अब कोई, हमारा कल भी क्या होगा
हमारा कल भी क्या होगा|
न अपना था जो कल गुज़रा|

बड़ी रानाइयां होंगी जहाँ में हम नहीं होंगे,
हमारे एक न होने से, फ़साने कम नहीं होंगे
हमारा आज चर्चा है तो कल औरों का फिर होगा|
न अपना था जो कल गुज़रा|

उजड़ने को है ये महफ़िल नयी आबाद कर लेना,
नयी बुनियाद जब रखो हमें भी याद कर लेना
दुखाना दिल को न हरगिज दुखाकर दिल को क्या होगा|
न अपना था जो कल गुज़रा|
जो अब है वह है गैरों का
नहीं उम्मीद अब कोई हमारा कल भी क्या होगा

हमारा कल भी क्या होगा|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

Leave a Reply

%d bloggers like this: