अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए!

स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी मेरे अग्रज और गुरु तुल्य रहे हैं| उनसे अनेक बार मिलने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ था| बहुत सहज और सरल हृदय इंसान और सृजनशील गीतकार थे|

लीजिए आज प्रस्तुत है डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक –


दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिए,
सारे जहां ने हाथ में पत्थर उठा लिए|

रहते हमारे पास तो ये टूटते जरूर,
अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए|

चाहा था एक फूल ने तड़पे उसी के पास,
हमने खुशी के पाँवों में काँटे चुभा लिए|

सुख, जैसे बादलों में नहाती हों बिजलियाँ,
दुख, बिजलियों की आग में बादल नहा लिए|

जब हो सकी न बात तो हमने यही किया,
अपनी ग़ज़ल के शेर कहीं गुनगुना लिए|

अब भी किसी दराज में मिल जाएँगे तुम्हें,
वो खत जो तुम्हें दे न सके लिख लिखा लिए।


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
******

2 thoughts on “अच्छा किया जो आपने सपने चुरा लिए!”

Leave a Reply

%d bloggers like this: