खामोशी पहचाने कौन 2

सदियों-सदियों वही तमाशा
रस्ता-रस्ता लम्बी खोज
लेकिन जब हम मिल जाते हैं
खो जाता है जाने कौन ।

निदा फाज़ली

Leave a Reply

%d bloggers like this: