हम बहते धारे हैं!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह एक युगल गीत है जो मुकेश जी ने आशा भौंसले जी के साथ मिलकर गाया है |

फिल्म ‘रफ्तार’ के लिए अभिलाष जी के लिखे इस गीत को सोनिक ओमी जी ने अपने संगीत से सजाया है और मुकेश जी और आशा जी ने इसे लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|

इस गीत में जीवन को लेकर एक दर्शन भी देने का प्रयास किया गया है, लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और आशा जी का यह सुरीला गीत:


संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|
संसार है इक नदिया|

चलते हुए जीवन की
रफ़्तार में एक लय है
इक राग में, इक सुर में
संसार की हर शै है,
संसार की हर शे है|


इक तार पे गर्दिश में
ये चाँद सितारे हैं,
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|
संसार है इक नदिया|


धरती पे अम्बर की
आँखों से बरसती हैं
इक रोज़ यही बूंदें
फिर बादल बनती हैं|
इस बनने बिगड़ने के
दस्तूर में सारे हैं|
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|


कोई भी किसी के लिए
अपना न पराया है
रिश्तों के उजाले में
हर आदमी साया है,
हर आदमी साया है|

क़ुदरत के भी देखो तो
ये खेल निराले हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं |
संसार है इक नदिया|


है कौन वो दुनिया में
न पाप किया जिसने
बिन उलझे कांटों से
हैं फूल चुने किसने,
हैं फूल चुने किसने|
बेदाग नहीं कोई
यहां पापी सारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं|

संसार है इक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं
न जाने कहाँ जाएं
हम बहते धारे हैं |


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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