अंखियों का नूर है तू!

आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश से संबंधित एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, यह एक युगल गीत है जो मुकेश जी ने सुमन कल्याणपुर जी के साथ मिलकर गाया है |

फिल्म ‘जौहर महमूद इन गोवा ‘ जो कि किसी बड़े बैनर की और ज्यादा समय तक याद रहने वाली फिल्म नहीं थी, लेकिन उसके लिए क़मर जलालाबादी जी के लिखे इस गीत को कल्याणजी आनंदजी ने अपने संगीत से सजाया है और मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी ने इसे लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|

इस गीत में प्रेम और रोमांस का एक अलग अंदाज़ देखने को मिलता है, लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और सुमन कल्याणपुर जी का यह सुरीला गीत:

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अँखियों का नूर है तू
अँखियों से दूर है तू
फिर भी पुकारे चले जायेंगे,
तू आये ना आये
फिर भी पुकारे चले जायेंगे |

दिल में पयाम तेरा,
लब पे है नाम तेरा
हो के दीवाने तेरे प्यार में,
लो आये जी आये
हो के दीवाने तेरे प्यार में|


ओ मेरे हमराज़ कहाँ है,
मुझको दे आवाज़ कहाँ है
प्यार की आँखों से तुम देखो,
इश्क़ वहीं है हुस्न जहाँ है |

छुप छुप के आनेवाले,
दिल को जलानेवाले
चुपके से आ जा मेरे सामने
तू आजा रे आ जा,
चुपके से आ जा मेरे सामने

इसलिए आया हूँ मैं छुपके,
देखके हमको दुनिया जले ना
प्यार की महफ़िल कितनी अनोखी,
नूर है लेकिन दीप जले ना|

यादों के दाग़ ले के,
दिल के चिराग ले के
कब से खड़ा हूँ तेरे सामने
तू माने ना माने
कब से खड़ा हूँ तेरे सामने|


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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