आवारगी 2

ये दिल, ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया, आवारगी
इस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ, आवारगी।

मोहसिन नक़वी

4 Comments

    1. जी वास्तव में मोहसिन नक़वी जी की लिखी इस ग़ज़ल को गुलाम अली जी ने बहुत खूबसूरती से गाया है।

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