देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम !

देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम
प्यार का ये महूरत निकल जाएगा
देखती ही रहो आज दर्पण ना तुम
प्यार का ये महूरत निकल जाएगा|
नई उम्र की नई फसल

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