ये शरमसार मौसम बदल जाएगा!

साँस की तो बहुत तेज़ रफ़्तार है
और छोटी बहुत है मिलन की घडी
गूंथते गूंथते ये घटा साँवरी
बुझ न जाए कही रूप की फुलझड़ी
चूड़ियाँ ही न तुम
चूड़ियाँ ही न तुम खनखनाती रहो
ये शरमसार मौसम बदल जाएगा|

नई उमर की नई फसल

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