सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी!

सुर्ख होठों पे उफ़ ये हँसी मदभरी
जैसे शबनम अंगारो की मेहमान हो
जादू बुनती हुई ये नशीली नज़र
देख ले तो खुदाई परेशान हो
मुस्कुराओ न ऐसे
मुस्कुराओ न ऐसे चुराकर नज़र
आइना देख सूरत मचल जाएगा|

नई उम्र की नई फसल

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