सबका दामन भीगा लगता है!

इस बस्ती में कौन हमारे आंसू पोंछेगा,
जो मिलता है उसका दामन भीगा लगता है|

क़ैसर उल जाफ़री

4 thoughts on “सबका दामन भीगा लगता है!”

    • धन्यवाद जी, यह पंकज उधास जी द्वारा गाई गई गजलों में शामिल है।

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