धमकियों की संस्कृति!

आज भारतीय क्रिकेट के बहाने कुछ बात कर लेते हैं|

क्रिकेट तो वैसे ही अनिश्चितताओं का खेल है, कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि वह जीतेगा| भारतीय टीम का मामला उससे भी कुछ आगे का है| हमारी क्रिकेट टीम का ऐसा रिकॉर्ड है कि वे दुनिया की सबसे मजबूत टीम को भी हरा सकते हैं और सबसे कमजोर टीम से भी हार सकते हैं|

यह भी हो सकता है कि हमें ही ऐसा लगता हो क्योंकि हमने क्रिकेट को एक तरह से अपना राष्ट्रीय खेल मान लिया है| यह खेल भी ऐसा है कि हर देखने वाला इस पर अपने एक्सपर्ट कमेंट्स दे सकता है|

यह लगाव खेल से अच्छी बात है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि यह एक खेल है और इसमें कोई परिणाम की गारंटी नहीं दे सकता| खास तौर पर जब मुकाबला हमारे और पाकिस्तान के बीच हो रहा हो, तब कुछ वीर पुरूष इसको राष्ट्रीय गौरव से जोड़ लेते हैं और कुछ तो परिणाम प्रतिकूल आने पर, किसी खास धर्म के खिलाड़ी पर अपना द्वेष उगल देते हैं, धमकियाँ देते हैं| ऐसे लोगों पर समुचित कार्रवाई होनी चाहिए|

वैसे कुछ लोग जान बूझकर ऐसा प्रचार भी करते हैं, कि ऐसा हो रहा है,क्योंकि पाकिस्तान भी यह चाहता है कि हमारे यहाँ धार्मिक विद्वेष की खबरें फैलें| उनके यहाँ क्या है, इसकी तो बात ही छोड़ दें, वैसे हमें उनके जैसा बनना भी नहीं है|

एक बार फिर से कहना चाहूँगा कि इस तरह विद्वेष का वातावरण न बनाया जाए| वैसे मुझे लगता है कि जब कोई खिलाड़ी परफ़ॉर्म न कर रहा हो तब उसके विज्ञापन बंद की जा सकते हैं , शायद यह कुछ प्रेरणा दे पाए|

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

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