बिखर जाएगा, फिर रात का रंग!

तुम नहीं आओगे जब, फिर भी तो तुम आओगे,
ज़ुल्‍फ़ दर ज़ुल्‍फ़ बिखर जाएगा, फिर रात का रंग,
शब–ए–तन्‍हाई में भी लुत्‍फ़–ए–मुलाक़ात का रंग|

अली सरदार जाफरी

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